मुंबई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते संकट के बीच भारत, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने रणनीतिक सहयोग मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। मंगलवार को मुंबई में तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की त्रिपक्षीय बैठक हुई। इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और साझा आर्थिक प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई।
बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो और यूएई के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान शामिल हुए। यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर चर्चा
बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित जहाजरानी और इसके आर्थिक प्रभावों पर विचार किया गया। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां लंबे समय तक व्यवधान रहने से तेल की कीमतों, परिवहन लागत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ सकता है।
सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन और ऊर्जा ढांचे पर हूती हमलों से भी क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। ऐसे हालात में तीनों देशों के बीच समन्वय को ऊर्जा आपूर्ति निर्बाध बनाए रखने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बैठक के बाद कहा कि जयशंकर और शेख अब्दुल्ला के साथ क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा तथा साझा आर्थिक प्राथमिकताओं पर चर्चा करना उपयोगी रहा।
भारत-यूएई संबंधों की भी समीक्षा
त्रिपक्षीय बैठक से पहले जयशंकर ने यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की। इसमें व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा, शिक्षा और परिवहन संपर्क सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की गई।
जयशंकर ने पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने ऊर्जा, व्यापार और उर्वरक की आपूर्ति को सुरक्षित तथा निर्बाध बनाए रखने की आवश्यकता भी रेखांकित की।
रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर
भारत ऊर्जा का प्रमुख आयातक है, जबकि अमेरिका और यूएई वैश्विक ऊर्जा बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पश्चिम एशिया में अस्थिरता का असर तीनों देशों के आर्थिक हितों पर पड़ सकता है। ऐसे में यह बैठक ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।





