नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अहम माने जाने वाले हार्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के दोबारा खुलने से भारत सहित आयात-निर्भर देशों को बड़ी राहत मिलने के संकेत मिले हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रयासों और क्षेत्रीय तनाव में नरमी के बाद इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से कच्चे तेल और एलएनजी की आवाजाही फिर से शुरू होने की संभावना है।
जानकारों के अनुसार, हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में संघर्ष और तनाव के कारण हार्मुज़ मार्ग पर बाधा उत्पन्न हुई थी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इस स्थिति से विशेष रूप से प्रभावित हुआ था।
अब इस मार्ग के फिर से खुलने की उम्मीद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हुआ है। ब्रेंट क्रूड में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आयात लागत में संभावित राहत की उम्मीद बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत की चालू खाता स्थिति और महंगाई पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि स्थिति अभी पूरी तरह स्थिर नहीं है। भले ही जलडमरूमध्य खुल जाए, लेकिन बीमा लागत, शिपिंग रेट और सुरक्षा जोखिम कुछ समय तक ऊंचे बने रह सकते हैं। इसके अलावा, आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह सामान्य होने में कुछ महीने लग सकते हैं।
ऊर्जा क्षेत्र के विश्लेषकों का मानना है कि भारत ने पिछले वर्षों में कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाकर अपनी निर्भरता कुछ हद तक कम की है, जिससे किसी भी क्षेत्रीय संकट के प्रभाव को सीमित करने में मदद मिली है। फिर भी, हार्मुज़ मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा वहन करता है, इसलिए इसका खुलना विश्व ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकारी स्तर पर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर रणनीतिक भंडारण तथा वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों पर जोर दिया जा रहा है।
कुल मिलाकर, हार्मुज़ जलडमरूमध्य का पुनः खुलना भारत के लिए तेल आपूर्ति के मोर्चे पर राहत का संकेत है, लेकिन विशेषज्ञ इसे “पूर्ण स्थिरता” की बजाय “धीमी सामान्यीकरण प्रक्रिया” के रूप में देख रहे हैं।





