वॉशिंगटन/नई दिल्ली। नासा-ईएसए के हबल स्पेस टेलीस्कोप ने अंतरिक्ष की एक और अद्भुत तस्वीर जारी की है, जिसमें NGC 6723 नामक ग्लोब्युलर स्टार क्लस्टर नजर आता है, जिसे उसके झिलमिलाते स्वरूप के कारण ‘चांदेलियर क्लस्टर’ (Chandelier Cluster) भी कहा जाता है। यह खगोलीय संरचना आकाशगंगा मिल्की वे के भीतर स्थित सबसे पुराने तारकीय समूहों में से एक है।
हबल द्वारा कैप्चर की गई इस तस्वीर में हजारों-लाखों तारे एक साथ बेहद घनी संरचना में दिखाई देते हैं, जो दूर से किसी झूमर (चांदेलियर) की तरह चमकते प्रतीत होते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह तारामंडल पृथ्वी से लगभग 27,000 प्रकाश-वर्ष दूर धनु (Sagittarius) तारामंडल में स्थित है।
विशेषज्ञों का कहना है कि NGC 6723 जैसे ग्लोब्युलर क्लस्टर में मौजूद तारे 10 अरब वर्ष से भी अधिक पुराने हो सकते हैं। यानी ये तारे हमारी आकाशगंगा के शुरुआती निर्माण काल के गवाह माने जाते हैं। यह क्लस्टर हजारों से लेकर लाखों तारों का समूह है, जो गुरुत्वाकर्षण के कारण एक-दूसरे से बंधे रहते हैं।
हबल टेलीस्कोप की नई अल्ट्रावायलेट और ऑप्टिकल इमेजिंग तकनीक ने इस क्लस्टर के अध्ययन को और अधिक विस्तृत बना दिया है। वैज्ञानिकों को यहां यह भी संकेत मिले हैं कि यह तारामंडल एक ही समय में नहीं बना, बल्कि इसमें अलग-अलग चरणों में तारा निर्माण की दो प्रमुख घटनाएं हुई थीं।
खगोलविदों के अनुसार, पहली और दूसरी तारा-निर्माण प्रक्रिया के बीच लगभग 63 करोड़ वर्ष का अंतर रहा, जो ब्रह्मांडीय पैमाने पर बेहद छोटा समय माना जाता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह की खोजें न केवल आकाशगंगा के शुरुआती विकास को समझने में मदद करती हैं, बल्कि यह भी बताती हैं कि तारों के समूह अपेक्षा से कहीं अधिक जटिल और गतिशील होते हैं।
हबल की यह नई तस्वीर एक बार फिर अंतरिक्ष की रहस्यमयी और अद्भुत संरचनाओं की झलक पेश करती है, जो ब्रह्मांड की विशालता और उसकी सुंदरता को दर्शाती है।





