नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में आज पांच नए न्यायाधीशों ने शपथ ली। इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने उन्हें विधि और संविधान के प्रति वफादारी निभाने की प्रेरणा दी। न्यायपालिका में बढ़ती कार्यभार और न्याय की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है।
नई दिल्ली। भारत के सर्वोच्च न्यायालय में सोमवार को पांच नए न्यायाधीशों ने अपने पद की शपथ ली। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शपथ ग्रहण समारोह में कहा कि न्यायाधीशों का कर्तव्य केवल कानून लागू करना ही नहीं, बल्कि संविधान और न्याय के मूल्यों की रक्षा करना भी है।
शपथ ग्रहण करने वाले नए न्यायाधीशों में विभिन्न उच्च न्यायालयों के वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल हैं। उनके नामों की घोषणा पूर्व में ही की जा चुकी थी और यह कदम न्यायपालिका के तेजी से बढ़ते मामलों के बोझ को कम करने की दिशा में उठाया गया है।
न्यायपालिका विशेषज्ञों का कहना है कि पांच नए न्यायाधीशों के जुड़ने से न केवल सुप्रीम कोर्ट की कार्यक्षमता बढ़ेगी बल्कि मामलों के निपटारे में भी तेजी आएगी। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की विश्वसनीयता और न्याय की गुणवत्ता बनाए रखना समय की आवश्यकता है।
शपथ ग्रहण समारोह में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, “न्यायपालिका केवल कानून का पालन नहीं करती, बल्कि समाज में न्याय और समानता का संदेश फैलाने का भी काम करती है। नए न्यायाधीशों से उम्मीद है कि वे निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्य निभाएंगे।”
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में नए न्यायाधीशों के आने से अपील और उच्च न्यायालयों से उठाए गए संवेदनशील मामलों के निपटान में गति आएगी। इससे आम जनता को भी न्याय मिलने में सुविधा होगी और लंबित मामलों का बोझ कम होगा।
सुप्रीम कोर्ट सूत्रों के अनुसार, नए न्यायाधीशों का चयन उनकी न्यायिक क्षमता, अनुभव और कानूनी क्षेत्र में योगदान को देखते हुए किया गया है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि न्यायपालिका अपने कार्य में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के प्रति गंभीर है।





