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जल प्रबंधन में क्रांति की तैयारी: इसरो और जल शक्ति मंत्रालय मिलकर करेंगे उपग्रह तकनीक का उपयोग

नई दिल्ली। देश में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए जल शक्ति मंत्रालय और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच उपग्रह तकनीक आधारित सहयोग को मजबूत करने की तैयारी है। दोनों संस्थानों के बीच जल्द ही एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) होने की संभावना है, जिसका उद्देश्य जल संसाधनों के आकलन, निगरानी और प्रबंधन को आधुनिक तकनीक से सशक्त बनाना है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस समझौते के तहत देशभर में जल प्रबंधन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में उपग्रह आधारित तकनीक का उपयोग बढ़ाया जाएगा। इसमें जल स्रोतों की निगरानी, भूजल आकलन, जल भंडारण की स्थिति, बाढ़ पूर्वानुमान और जल गुणवत्ता विश्लेषण जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल होंगे।

इस सहयोग के लिए लगभग 24 प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिनमें वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके माध्यम से देश में जल संसाधनों के डेटा संग्रहण और विश्लेषण की प्रक्रिया अधिक सटीक और प्रभावी हो सकेगी।

यह समझौता नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय जल अनुसंधान एवं विकास सम्मेलन के दौरान होने की संभावना है। इसी कार्यक्रम में जल क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई अन्य योजनाओं और पहलों की भी शुरुआत की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि उपग्रह तकनीक के उपयोग से जल प्रबंधन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। साथ ही, यह पहल जल संकट से निपटने और जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस पहल के तहत स्टार्टअप्स और शोध संस्थानों को भी जोड़ने की योजना है, ताकि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से जल प्रबंधन को और बेहतर बनाया जा सके।

जल विशेषज्ञों ने इस कदम को देश के जल संसाधन प्रबंधन में एक “टर्निंग पॉइंट” बताया है, जो आने वाले वर्षों में जल सुरक्षा और सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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