नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की तीन भाषा नीति को लेकर छात्रों और अभिभावकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई भाषा नीति के कारण कई छात्रों को शिक्षा में असुविधा हो रही है और उनका शैक्षणिक दबाव बढ़ रहा है।
याचिका में यह मांग की गई है कि बोर्ड को छात्रों और अभिभावकों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक विकल्प प्रदान करने चाहिए। उन्होंने कहा कि नीति लागू होने के बाद कई राज्यों के स्कूलों में छात्रों को उनकी मातृभाषा या उनकी इच्छित भाषा में पढ़ाई करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में छात्रों और अभिभावकों ने पीआईएल (Public Interest Litigation) के माध्यम से राहत की गुहार लगाई है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि शिक्षा का उद्देश्य छात्रों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है, न कि उन्हें अनावश्यक बोझ देना।
विशेषज्ञों का मानना है कि तीन भाषा नीति का उद्देश्य छात्रों में बहुभाषिक क्षमता विकसित करना है, लेकिन इसकी अमल प्रक्रिया में कठिनाइयों ने छात्रों और अभिभावकों के लिए चुनौतियां पैदा की हैं। कुछ राज्य बोर्डों में पर्याप्त शिक्षकों की कमी और संसाधनों की कमी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि नीति के कारण कुछ छात्रों को उनकी मूल भाषा में पढ़ाई करने का अवसर नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा, अभिभावकों ने यह भी बताया कि कई स्कूलों में नई भाषा नीति की जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है और जल्द ही मामले पर आदेश आने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोर्ट छात्रों और अभिभावकों की ओर से उठाए गए मुद्दों पर ध्यान देती है, तो नीति में कुछ आवश्यक सुधार किए जा सकते हैं।
CBSE ने इस मामले पर कहा है कि तीन भाषा नीति का उद्देश्य छात्रों के भाषाई विकास और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है। बोर्ड ने सभी स्कूलों से अनुरोध किया है कि वे नीति को प्रभावी और सुलभ बनाने के लिए कदम उठाएं।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नीति का सही क्रियान्वयन और छात्रों के हितों की रक्षा दोनों आवश्यक हैं। इसके लिए स्कूलों, शिक्षकों और बोर्ड के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।
तीन भाषा नीति विवाद को लेकर यह याचिका छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत की उम्मीद जगाती है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर टिकी हुई है, जो शिक्षा और छात्रों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय दे सकता है।





