नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग शनिवार को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे। करीब सात साल बाद उनकी भारत यात्रा हो रही है। इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। चीन की ओर से इस यात्रा में ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने और ब्रिक्स की भूमिका बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण मंच बन गया है। बीजिंग खुलेपन, समावेशिता, परस्पर लाभ और निष्पक्षता के आधार पर ब्रिक्स सहयोग को आगे बढ़ाने की बात कर रहा है।
चीन की नई पहल पर रहेगा जोर
शी चिनफिंग शिखर सम्मेलन के दौरान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, ब्रिक्स के भविष्य और सदस्य देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा करेंगे। चीन डिजिटल अर्थव्यवस्था, हरित विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कृषि और गरीबी उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की पहल सामने रख सकता है।
चीन वर्ष 2027 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा। बीजिंग का कहना है कि वह अपने कार्यकाल के दौरान बहुपक्षवाद को मजबूत करने, सदस्य देशों की विकास रणनीतियों में तालमेल बढ़ाने और ग्लोबल साउथ की आवाज को अधिक प्रभावी बनाने पर काम करेगा।
ब्रिक्स के विस्तार पर भी नजर
चीन लंबे समय से ब्रिक्स को ग्लोबल साउथ के लिए प्रभावशाली मंच के रूप में विकसित करने की वकालत करता रहा है। 2017 में शी चिनफिंग ने ब्रिक्स प्लस मॉडल का प्रस्ताव रखा था, जिसके जरिए अधिक विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को सहयोग से जोड़ने की पहल हुई।
भारत की मेजबानी में हो रहे सम्मेलन में विकास, नवाचार, स्थिरता और व्यावहारिक सहयोग प्रमुख मुद्दे हैं। शी चिनफिंग की यात्रा को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेताओं की बैठक में द्विपक्षीय संबंधों और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।





