नई दिल्ली। राजस्थान के बारां जिले स्थित शाहाबाद वन क्षेत्र में प्रस्तावित बिजली परियोजना को लेकर पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। एक पर्यावरण संगठन ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित अरावली उच्चस्तरीय समिति को खुला पत्र लिखकर परियोजना पर तत्काल रोक लगाने और वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई नहीं होने देने की मांग की है।
संगठन का कहना है कि प्रस्तावित परियोजना से घने वन क्षेत्र, जैव विविधता और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। पत्र में समिति से आग्रह किया गया है कि वह स्थल का स्वतंत्र वैज्ञानिक मूल्यांकन कराए और पर्यावरणीय नुकसान को देखते हुए परियोजना की अनुमति पर पुनर्विचार की सिफारिश करे।
पर्यावरणविदों का तर्क है कि शाहाबाद वन क्षेत्र कई दुर्लभ वनस्पतियों और वन्यजीवों का महत्वपूर्ण आवास है। बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ने के साथ-साथ स्थानीय जल स्रोतों और वन आधारित आजीविका पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
संगठन ने समिति से अनुरोध किया है कि जब तक सभी पर्यावरणीय पहलुओं की निष्पक्ष समीक्षा पूरी नहीं हो जाती, तब तक परियोजना से जुड़े किसी भी निर्माण कार्य या वन कटाई की अनुमति न दी जाए। मामले को लेकर पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।





