नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार आने वाले एक वर्ष में धीमी पड़ने की संभावना जताई गई है। हाल ही में जारी एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ती अनिश्चितताओं, भू–राजनीतिक तनावों, उच्च ब्याज दरों और व्यापारिक बाधाओं के कारण वैश्विक आर्थिक विकास दर में गिरावट देखी जा सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था में जो रिकवरी देखी गई थी, वह अब कमजोर पड़ती नजर आ रही है। कई विकसित देशों—जैसे अमेरिका, यूरोप और चीन—में विकास दर पहले की तुलना में धीमी होने का अनुमान है। इसके साथ ही ऊर्जा कीमतों में उतार–चढ़ाव और सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याएं भी वैश्विक विकास पर दबाव बना रही हैं।
सर्वेक्षण के अनुसार अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी पहले जैसी मजबूती नहीं दिख रही है। निवेश प्रवाह में अस्थिरता और वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता के चलते विकासशील देशों पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि कुछ उभरती अर्थव्यवस्थाएं, विशेषकर एशिया की, अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर मौद्रिक नीतियों में सख्ती और कर्ज की ऊंची लागत भी आर्थिक गतिविधियों को धीमा कर रही है। इसके चलते आने वाले महीनों में वैश्विक मांग कमजोर रह सकती है।
रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि यदि भू–राजनीतिक तनाव और बढ़ते हैं, तो वैश्विक विकास दर पर और अधिक नकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षेत्र कुछ हद तक विकास को सहारा दे सकते हैं।
कुल मिलाकर, सर्वेक्षण यह दर्शाता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था फिलहाल एक नाजुक दौर से गुजर रही है और अगले एक वर्ष में इसकी रफ्तार और धीमी हो सकती है।





