सक्ती (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे के बाद कंपनी प्रबंधन ने प्रभावित परिवारों के लिए बड़े मुआवजे की घोषणा की है। मंगलवार को हुए दर्दनाक बॉयलर ब्लास्ट के बाद उपजे जनाक्रोश और शोक के बीच कंपनी ने आर्थिक सहायता और पुनर्वास के कदमों को स्पष्ट किया है।
मुआवजे और राहत राशि का विवरण
हादसे की गंभीरता को देखते हुए कंपनी ने मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए निम्नलिखित सहायता राशि की घोषणा की है:
- मृतकों के लिए: हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक मजदूर के परिवार को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
- नौकरी का आश्वासन: आर्थिक मुआवजे के साथ-साथ, मृतक के परिवार के एक सदस्य को योग्यतानुसार स्थायी नौकरी देने का भी भरोसा दिया गया है।
- घायलों के लिए: इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए श्रमिकों को 15 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा ताकि उनके उपचार और भविष्य में कोई बाधा न आए।
हादसे की भयावहता: 14 की मौत, 6 वेंटिलेटर पर
हादसे के समय प्लांट के भीतर लगभग 50 मजदूर कार्यरत थे। अचानक हुए जोरदार बॉयलर ब्लास्ट की चपेट में आने से 14 मजदूरों की असमय मृत्यु हो गई, जबकि 32 अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वर्तमान में 6 घायल मजदूरों की स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है और वे वेंटिलेटर पर जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि किसी को भी संभलने या बाहर भागने का मौका नहीं मिला।
प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप और राजनीतिक प्रतिक्रिया
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस घटना को अपनी ‘व्यक्तिगत क्षति’ बताते हुए गहरा दुख व्यक्त किया है। हालांकि, इस बयान के विपरीत राजनीतिक गलियारों और स्थानीय स्तर पर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
- कांग्रेस का हमला: कांग्रेस महासचिव कन्हैया अग्रवाल ने इस घटना को सीधे तौर पर प्रबंधन की लापरवाही करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्लांट में सुरक्षा मानकों (Safety Norms) की अनदेखी की जा रही थी।
- जांच की मांग: स्थानीय निवासी और श्रमिक संगठन इस मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।
क्या होता है इस प्लांट में?
सक्ती स्थित यह वेदांता पावर प्लांट मुख्य रूप से बिजली उत्पादन का केंद्र है। यहाँ कोयले का उपयोग करके थर्मल पावर तकनीक के जरिए बिजली बनाई जाती है। इस उत्पादित बिजली की आपूर्ति औद्योगिक क्षेत्रों और सरकारी ग्रिड में की जाती है। प्लांट के भीतर कोयला प्रोसेसिंग, बॉयलर संचालन और टर्बाइन जैसी जटिल प्रक्रियाएं चौबीसों घंटे चलती हैं।





