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विपक्ष में खींचतान तेज़

विपक्षी इंडिया ब्लॉक में नेतृत्व का विवाद अब बड़ा रूप लेता जा रहा है। सोमवार को तृणमूल ने एक बार फिर विपक्षी गठबंधन के नेतृत्व पर दावा ठोका और कांग्रेस को सच्चाई स्वीकार करने की नसीहत दी। पार्टी के सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि ज्यादातर घटक दल नेतृत्व में बदलाव चाहते हैं और मानते हैं कि भाजपा के खिलाफ बस पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी में ही लड़ने का माद्दा है। तृणमूल सांसद ने इस दौरान भाजपा के खिलाफ कमजोर स्ट्राइक रेट को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा।संसद भवन परिसर में आजाद ने कहा कि ज्यादातर घटक दल बदलाव चाहते हैं। सक्षम नेतृत्व चाहते हैं। राजद, सपा, शिवसेना यूबीटी, एनसीपी (एसपी) की ओर से सवाल उठे हैं। ममता के रूप में गठबंधन के पास एक बड़ा खिलाड़ी है। ऐसा खिलाड़ी, जिसकी नेतृत्व क्षमता से दुनिया परिचित है। फिर गठबंधन के सबसे वरिष्ठ नेता शरद पवार भी जब ऐसा कह रहे हैं तो कांग्रेस को समस्या क्या है? ऐसा लगता है कि रस्सी जल गई, मगर ऐंठ नहीं गई। कांग्रेस को समझना होगा कि वह सबको साथ ले कर नहीं चल पा रही। घटक दलों की अपेक्षा पर खरा नहीं उतर पा रही।भाजपा के खिलाफ कैसे लड़ेगी कांग्रेस…सांसद ने कहा कि भाजपा के खिलाफ कांग्रेस और तृणमूल का स्ट्राइक रेट देखिए। कांग्रेस का स्ट्राइक रेट महज 10 फीसदी है, जबकि हमारा 70 फीसदी। ममता के नेतृत्व में महज पश्चिम बंगाल ही ऐसा प्रदेश है, जहां हमारा वोट प्रतिशत बढ़ा है। यह बताता है कि भाजपा से सीधी लड़ाई लड़ने में बस ममता ही सक्षम हैं।

इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व पर तृणमूल के दावे पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि टीएमसी और ममता का प्रभाव बस पश्चिम बंगाल तक सीमित है। राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य की बात करें तो ममता और उनकी पार्टी का व्यक्तित्व उतना बड़ा नहीं है, जितना उनके संदर्भ में दावा किया जा रहा है।

आजाद ने ममता की ओर से गठबंधन का नेतृत्व करने की जताई गई इच्छा के संदर्भ में कहा कि विपक्ष को भाजपा के खिलाफ बड़ी और निर्णायक लड़ाई लड़नी है। कांग्रेस के नेतृत्व में लड़ाई संभव नहीं है। गठबंधन के घटक दल ही कह रहे हैं कि ममता में भाजपा से सीधी लड़ाई लड़ने की क्षमता है। बस कांग्रेस इस सच्चाई को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं दिख रही।

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