नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के लगातार विरोध और हंगामे के बावजूद केंद्र सरकार ने अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सफलता हासिल की। लोकसभा और राज्यसभा में तीखी राजनीतिक नोकझोंक के बीच सरकार ने परीक्षा सुधार, राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और अन्य प्रमुख विषयों से जुड़े विधेयकों पर आगे बढ़ते हुए उन्हें मंजूरी दिलाई।
सत्र के दौरान सबसे अधिक चर्चा सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 और वंदे मातरम् से संबंधित संशोधन विधेयक को लेकर रही। एंटी पेपर लीक विधेयक के जरिए सरकार ने परीक्षा माफियाओं पर सख्त कार्रवाई, त्वरित जांच और कठोर दंड का प्रावधान किया है। वहीं वंदे मातरम् विधेयक राष्ट्रीय गीत के अपमान या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान करता है।
इन विधेयकों पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार पर लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया। विपक्षी दलों ने हालिया छात्र आंदोलनों, पेपर लीक प्रकरण और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा। इसी विरोध के चलते कई विपक्षी सांसदों ने सदन से वॉकआउट भी किया।
सरकार ने अपने पक्ष में कहा कि संसद का दायित्व केवल बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि जनहित से जुड़े कानूनों को समय पर पारित करना भी उतना ही आवश्यक है। केंद्रीय मंत्रियों ने दावा किया कि नए कानूनों से परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी होगी और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को कानूनी संरक्षण मिलेगा।
मानसून सत्र के पहले चरण में विपक्ष के विरोध के कारण कई बार कार्यवाही बाधित रही, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने अपने विधायी कार्यक्रम को गति दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्र के आगामी दिनों में भी सरकार और विपक्ष के बीच कई अहम मुद्दों पर टकराव जारी रह सकता है।





