उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ से भारत-चीन सीमा व्यापार एक बार फिर शुरू होने जा रहा है। लंबे अंतराल के बाद लिपुलेख दर्रे के माध्यम से पारंपरिक व्यापार गतिविधियों को पुनर्जीवित करने की तैयारी पूरी कर ली गई है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
कोविड-19 महामारी और सीमा परिस्थितियों के कारण पिछले कुछ वर्षों से यह व्यापार बंद था। अब दोनों देशों के बीच स्थानीय स्तर पर सहमति बनने के बाद सीमित दायरे में व्यापार दोबारा प्रारंभ किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, व्यापार शुरू होने से धारचूला और आसपास के सीमांत क्षेत्रों के व्यापारियों तथा स्थानीय निवासियों को सीधा लाभ मिलेगा।
लिपुलेख दर्रा सामरिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दर्रा भारत, तिब्बत (चीन) और नेपाल के त्रि-जंक्शन क्षेत्र के निकट स्थित है और लंबे समय से पारंपरिक सीमा व्यापार तथा कैलाश मानसरोवर यात्रा का प्रमुख मार्ग रहा है। वर्ष 1992 में इस मार्ग को सीमित व्यापार के लिए खोला गया था, जिसके बाद स्थानीय व्यापारियों द्वारा वस्तुओं का आदान-प्रदान नियमित रूप से किया जाता रहा।
सीमा व्यापार के अंतर्गत भारतीय व्यापारी कपड़े, मसाले, दैनिक उपयोग की वस्तुएं और कृषि उत्पाद निर्यात करते हैं, जबकि तिब्बत क्षेत्र से ऊन, जड़ी-बूटियां और पारंपरिक उत्पाद भारत लाए जाते हैं। यह व्यापार केवल पंजीकृत सीमावर्ती व्यापारियों के माध्यम से संचालित होता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि व्यापार पुनः शुरू होने से सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही पलायन की समस्या को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। सीमा व्यापार की बहाली को सीमावर्ती विकास और क्षेत्रीय आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





