नई दिल्ली। लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था देने को लेकर केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत अब अगले चरण में पहुंच गई है। गृह मंत्रालय ने लेह एपेक्स बॉडी (LAB), कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर सात प्रमुख बिंदुओं पर ड्राफ्ट प्रस्ताव मांगा है। इस प्रस्ताव के आधार पर अक्टूबर में होने वाली अगली बैठक की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
हालिया बैठक में गृह मंत्रालय ने लद्दाख के लिए तीन-स्तरीय प्रशासनिक ढांचे का खाका सामने रखा। इसमें केंद्र शासित प्रदेश स्तर की एक सर्वोच्च संस्था, स्वायत्त जिला परिषदें और पंचायतें शामिल होंगी। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य क्षेत्र में प्रशासनिक समन्वय और विकास को मजबूत करना है।
मंत्रालय ने लद्दाख के प्रतिनिधियों से यूटी स्तर की प्रस्तावित संस्था और उसकी कार्यकारी इकाई के नाम व स्वरूप पर सुझाव मांगे हैं। इसके अलावा संस्था के सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया पर भी राय मांगी गई। लद्दाख के प्रतिनिधियों ने यूटी स्तर की संस्था के लिए प्रत्यक्ष चुनाव कराने पर सहमति जताई है।
बैठक में यूटी स्तर की संस्था और स्वायत्त जिला परिषदों के बीच अधिकारों के बंटवारे को लेकर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि प्रस्तावित निर्वाचित संस्था किन विषयों पर कानून बनाने की शक्ति रखेगी।
बैठक के बाद प्रशासन की ओर से बताया गया कि लद्दाख के प्रतिनिधियों को संवैधानिक सुरक्षा के मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट की गई है। वहीं, 24 सितंबर 2025 की हिंसक घटनाओं से जुड़े मामलों को वापस लेने और प्रभावित लोगों को मुआवजा देने की मांग को उपराज्यपाल के समक्ष रखने का आश्वासन भी दिया गया है।
हालांकि, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है। उनका कहना है कि जब तक यूटी स्तर की प्रस्तावित संस्था पूरी तरह गठित नहीं हो जाती, तब तक उसके अधिकारों को लेकर जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए।





