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रिपोर्ट का दावा: असीम मुनीर ने ईरान-सऊदी तनाव कम करने के लिए कराई गुप्त डील, तेल समझौते का लिया सहारा

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को लेकर एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उन्होंने ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव कम करने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। रिपोर्ट के अनुसार, मुनीर ने कथित तौर पर एक निजी तेल परिवहन समझौते का इस्तेमाल कर दोनों देशों के बीच एक गुप्त समझ बनाने की कोशिश की। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक वरिष्ठ अधिकारी से जुड़े कथित कारोबारी संबंधों का इस्तेमाल कर सऊदी अरब पर ईरानी हमलों को रोकने की कोशिश की। इसमें दावा किया गया है कि यह समझौता मार्च के अंत में हुआ था, जिसके बाद सऊदी अरब पर हमलों में कमी आई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कथित समझौते का केंद्र एक तेल परिवहन परियोजना थी, जिसके जरिए ईरानी तेल को पाकिस्तान तक पहुंचाने की बात कही गई है। दावा है कि इस कारोबारी व्यवस्था को जारी रखने का मुद्दा बातचीत में एक महत्वपूर्ण पहलू बना। हालांकि, इस पूरे मामले को लेकर कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों के अनुसार, पाकिस्तान लंबे समय से ईरान और सऊदी अरब दोनों के साथ संबंधों में संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा है। सऊदी अरब पाकिस्तान का महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदार है, जबकि ईरान के साथ उसके ऐतिहासिक, भौगोलिक और व्यापारिक संबंध हैं। ऐसे में इस्लामाबाद दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिशें करता रहा है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि असीम मुनीर ने क्षेत्रीय कूटनीति में पाकिस्तान की भूमिका बढ़ाने का प्रयास किया है। हाल के घटनाक्रमों में पाकिस्तान ने खुद को ईरान और पश्चिमी देशों के बीच संवाद के लिए एक संभावित मध्यस्थ के रूप में पेश किया है।

हालांकि, इस कथित गुप्त समझौते को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक आधिकारिक पुष्टि या ठोस प्रमाण सामने नहीं आते, तब तक इन दावों को केवल रिपोर्ट के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम एशिया में ईरान, सऊदी अरब और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के बीच संबंधों में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। پاکستان की कूटनीतिक भूमिका पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।

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