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राहुल गांधी के नेतृत्व में राष्ट्रपति भवन तक विपक्ष का मार्च, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन के सांसदों ने शुक्रवार को संसद भवन से राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च किया। विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से हस्तक्षेप की मांग की।

मार्च के बाद विपक्ष के 10 नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। इस दौरान नेताओं ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर अपनी चिंताएं रखीं। अन्य विपक्षी सांसद विजय चौक पर धरने पर बैठे रहे और विरोध प्रदर्शन किया।

विपक्ष ने रखीं तीन प्रमुख मांगें

विपक्ष की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक और मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए नामों को दोबारा शामिल करना शामिल है। विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए और चुनाव आयोग के कामकाज पर चिंता जताई।

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में वोटों की चोरी हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं।

करीब 150 सांसदों ने लिया हिस्सा

मार्च से पहले संसद के सेंट्रल हॉल में इंडिया गठबंधन के करीब 150 सांसदों की बैठक हुई। इसमें 16 राजनीतिक दलों के नेताओं ने राष्ट्रपति को सौंपे जाने वाले ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। ज्ञापन में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चिंता व्यक्त की गई।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी चुनाव प्रक्रिया को लेकर सरकार पर निशाना साधा। वहीं, राजद सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि विपक्ष की मांग चुनाव व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को दूर करने की है।

चुनावी प्रक्रिया को लेकर बढ़ा सियासी टकराव

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद लगातार चर्चा में है। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। वहीं, इस मामले में उठाए गए आरोपों और मांगों पर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को फिर प्रमुखता से उठाया है। इस घटनाक्रम से केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत हैं।

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