देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठन और चुनावी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। पार्टी का फोकस राष्ट्रवाद के साथ युवा मतदाताओं को जोड़ने और मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन का आकलन करने पर है। इसके लिए विधायकों के कामकाज की समीक्षा भी की जाएगी।
भाजपा संगठन का मानना है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में युवा मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इसी को देखते हुए पार्टी नए और युवा चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। साथ ही बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और नए मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने की कवायद तेज की जा रही है।
पार्टी की रणनीति में राष्ट्रवाद को भी प्रमुख मुद्दे के रूप में रखा जा रहा है। उत्तराखंड की सैन्य पृष्ठभूमि और बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक परिवारों को देखते हुए भाजपा राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को चुनावी विमर्श में प्रमुखता देने की तैयारी में है।
इसके साथ ही वर्तमान विधायकों के प्रदर्शन को लेकर भी संगठन गंभीरता से मंथन करेगा। क्षेत्र में सक्रियता, जनता के बीच पकड़, विकास कार्यों की स्थिति और संगठन के साथ समन्वय जैसे विभिन्न पहलुओं के आधार पर विधायकों का मूल्यांकन किए जाने की संभावना है। कमजोर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों में संगठनात्मक स्तर पर सुधार के कदम उठाए जा सकते हैं।
भाजपा की नजर खास तौर पर पहली बार मतदान करने वाले युवाओं पर है। रोजगार, शिक्षा, कौशल विकास और स्वरोजगार जैसे मुद्दों को लेकर युवाओं के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने की योजना है। हालांकि राज्य में बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवाल युवाओं के बीच लगातार उठते रहे हैं। जुलाई में हजारों बेरोजगार युवाओं ने पारदर्शी भर्ती और लंबित परिणाम जारी करने की मांग को लेकर देहरादून में प्रदर्शन भी किया था।
पार्टी संगठन आने वाले समय में सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के साथ स्थानीय स्तर की समस्याओं पर भी फीडबैक लेने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि विधायकों की रिपोर्ट और क्षेत्रीय फीडबैक के आधार पर चुनावी रणनीति में बदलाव किए जा सकते हैं।
इस तरह भाजपा 2027 के चुनाव के लिए जहां राष्ट्रवाद और सरकार की उपलब्धियों को प्रमुख आधार बनाने की तैयारी में है, वहीं युवा मतदाताओं और नए चेहरों पर दांव लगाने की रणनीति भी तैयार कर रही है।





