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रक्षा परियोजनाओं में देरी पर राजनाथ की चिंता, कहा- समयसीमा व्यावहारिक रखें

बेंगलुरु। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए परियोजनाओं के लिए व्यावहारिक और स्पष्ट समयसीमा तय करने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में देरी से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि तकनीक के समय से पहले पुरानी पड़ने का जोखिम भी रहता है।

बेंगलुरु में शुक्रवार को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के कार्यक्रम में स्वदेशी विमान और हेलीकॉप्टर औपचारिक रूप से संबंधित संस्थानों को सौंपे गए। इस दौरान दो एलसीए तेजस एमके-1 ट्रेनर और तीन एचटीटी-40 बेसिक ट्रेनर विमान भारतीय वायुसेना को दिए गए। वहीं चार ध्रुव एनजी हेलीकॉप्टर पवन हंस लिमिटेड को सौंपे गए।

राजनाथ सिंह ने कहा कि तकनीकी परियोजनाओं में देरी को गंभीरता से लेने की जरूरत है। उनके अनुसार, देरी के कारण महत्वपूर्ण रक्षा जरूरतें समय पर पूरी नहीं हो पातीं और लागत में भी बढ़ोतरी होती है। साथ ही, किसी तकनीक के तैयार होकर सेना तक पहुंचने तक दुनिया में उससे बेहतर तकनीक विकसित हो जाने की संभावना रहती है।

तेजस एमके-1ए की डिलीवरी में देरी

रक्षा मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारतीय वायुसेना के लिए तेजस एमके-1ए विमानों की डिलीवरी में देरी चल रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, विमान में रडार, हथियार और अन्य प्रणालियों के एकीकरण से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों के कारण डिलीवरी प्रभावित हुई है। वायुसेना के लिए दो अलग-अलग अनुबंधों में कुल 180 तेजस एमके-1ए विमानों का ऑर्डर दिया गया है।

स्वदेशी तकनीक पर जोर

राजनाथ सिंह ने युवा वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, डिजाइनरों, टेस्ट पायलटों और तकनीशियनों से नई तकनीकों के विकास पर ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियों, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, साइबर तकनीक और अगली पीढ़ी की प्रणोदन तकनीकों में स्वदेशी क्षमता विकसित करने पर जोर दिया।

उन्होंने सरकारी और निजी क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी के बजाय सहयोगी के रूप में काम करने की आवश्यकता भी बताई, ताकि देश की एयरोस्पेस क्षमताओं को आगे बढ़ाया जा सके।

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