मॉस्को: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल रूस की राजधानी मॉस्को में उच्च स्तरीय दौरों और बैठकों के जरिए भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने में जुटे हैं। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने के रूप में देखा जा रहा है।
डोभाल ने मॉस्को में रूस के वरिष्ठ सुरक्षा और राजनीतिक नेतृत्व के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा साझेदारी और रणनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान भारत और रूस ने बदलते वैश्विक हालात में आपसी सहयोग को और गहरा करने पर जोर दिया। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में स्थिर और भरोसेमंद साझेदारी बेहद जरूरी है।
डोभाल की इस यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र में सहयोग, सैन्य प्रशिक्षण, और तकनीकी साझेदारी जैसे मुद्दों पर विशेष फोकस रहा। इसके साथ ही समुद्री मार्गों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति जैसे अहम क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर विचार हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और भारत अपनी “रणनीतिक स्वायत्तता” की नीति के तहत प्रमुख शक्तियों के साथ संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
मॉस्को में आयोजित सुरक्षा मंचों और उच्च स्तरीय बैठकों में डोभाल की भागीदारी ने यह संकेत दिया है कि भारत-रूस संबंध केवल पारंपरिक रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अब यह ऊर्जा, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे व्यापक क्षेत्रों तक विस्तार कर रहे हैं।
रूस ने भी भारत के साथ अपने संबंधों को “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” बताते हुए आगे सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है।
यह दौरा भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे भरोसे और सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





