नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल शिक्षा में दाखिले की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें छात्रों को समान अवसर मिले और किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।
नड्डा ने अधिकारियों से कहा कि मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया तय नियमों और निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित की जाए। उन्होंने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि अभ्यर्थियों को सही जानकारी समय पर उपलब्ध हो और काउंसलिंग व सीट आवंटन की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट तरीके से पूरी की जाए।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रवेश से जुड़ी शिकायतों का तेजी से समाधान किया जाए और छात्रों व अभिभावकों को किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बचाने के लिए जागरूक किया जाए।
मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए देशभर में राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं और काउंसलिंग व्यवस्था का पालन किया जाता है। स्नातक मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए National Testing Agency द्वारा आयोजित NEET जैसी परीक्षाओं के माध्यम से प्रक्रिया संचालित होती है।
सरकार पहले भी मेडिकल शिक्षा में एक समान और पारदर्शी प्रवेश व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कदम उठा चुकी है। सामान्य काउंसलिंग व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को कई स्तरों पर आवेदन करने की परेशानी से बचाना और प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है।
जेपी नड्डा ने कहा कि मेडिकल शिक्षा देश के स्वास्थ्य ढांचे की नींव है और इसमें गुणवत्ता के साथ-साथ निष्पक्षता भी जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रवेश प्रक्रिया में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल, निगरानी और जवाबदेही को बढ़ावा दिया जाए, ताकि योग्य छात्रों को बिना किसी बाधा के अवसर मिल सके।
सरकार का उद्देश्य मेडिकल शिक्षा में विश्वास कायम करना और ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें हर योग्य उम्मीदवार को योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिले।





