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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन की प्रतीकात्मक महाभियोग सुनवाई, खरगे ने पेश किया प्रस्ताव

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी INDIA गठबंधन ने शनिवार को दिल्ली में प्रतीकात्मक जन-महाभियोग कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में कांग्रेस सहित गठबंधन के करीब 21 विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। विपक्ष ने चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोट चोरी को लेकर गंभीर आरोप लगाए।

यह कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सरकारी आवास 10, राजाजी मार्ग पर आयोजित किया गया। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इसकी अध्यक्षता की, जबकि खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग प्रस्ताव पेश किया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कार्यक्रम के समापन पर अपना संबोधन दिया।

बारिश के कारण टालना पड़ा कार्यक्रम

विपक्ष ने पहले यह कार्यक्रम 30 अक्टूबर को आयोजित करने की योजना बनाई थी, लेकिन दिल्ली में बारिश के कारण इसे एक दिन के लिए टाल दिया गया। इससे पहले कार्यक्रम के लिए अशोक होटल और रामलीला मैदान जैसे स्थानों पर आयोजन की कोशिश की गई थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद खरगे के आवास पर इसे आयोजित करने का फैसला लिया गया।

SIR और वोट चोरी को लेकर लगाए आरोप

विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। गठबंधन का कहना है कि इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

कार्यक्रम में विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों के अलावा मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का दावा करने वाले कुछ लोग और नागरिक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। नेताओं ने अपनी बात रखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की मांग दोहराई।

1 नवंबर को रामलीला मैदान में रैली

INDIA गठबंधन ने इस कार्यक्रम के बाद 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने की भी योजना बनाई है। इस रैली में वोट चोरी और मतदाता सूची पुनरीक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध दर्ज कराया जाएगा।

विपक्ष का कहना है कि उसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। वहीं, यह प्रतीकात्मक कार्यक्रम कोई संवैधानिक महाभियोग प्रक्रिया नहीं है, बल्कि विपक्ष की ओर से विरोध दर्ज कराने का राजनीतिक आयोजन है।

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