चंबा (टिहरी गढ़वाल)। उत्तराखंड के टिहरी जिले की हेंवल नदी के पुनर्जीवीकरण की कहानी अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ के 139वें संस्करण में हेंवल नदी का उल्लेख करते हुए स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इसे जल संरक्षण और पर्यावरण बचाने के लिए सामूहिक भागीदारी का प्रेरक उदाहरण बताया।
80 गांवों को मिल रहा पेयजल
हेंवल नदी चंबा शहर और आसपास के करीब 80 गांवों की पेयजल जरूरतों से जुड़ी है। कुछ समय पहले नदी में पानी कम होने लगा था और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोत भी सूखने लगे थे। इससे क्षेत्र में जल संकट की आशंका बढ़ गई थी।
स्थिति को देखते हुए स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन ने नदी को पुनर्जीवित करने के लिए मिलकर अभियान चलाया। इस पहल में वर्षा जल को रोकने, पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने और बड़े पैमाने पर पौधरोपण जैसे उपाय किए गए।
जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रकृति के प्रति सम्मान और जलस्रोतों की देखभाल हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने हेंवल नदी का उदाहरण देते हुए बताया कि स्थानीय लोगों के प्रयासों से नदी को नया जीवन मिला है। साथ ही, क्षेत्र के दर्जनों प्राकृतिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने में भी मदद मिली है।
सामुदायिक भागीदारी बनी बदलाव की ताकत
हेंवल नदी का पुनर्जीवीकरण बताता है कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में स्थानीय समुदाय की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। पहाड़ी क्षेत्रों में जलस्रोतों का सूखना पेयजल, खेती और ग्रामीण जीवन को प्रभावित करता है। ऐसे में वर्षा जल संचयन, पौधरोपण और जलस्रोतों की देखभाल जैसे उपाय लंबे समय तक लाभ पहुंचा सकते हैं।
प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में हेंवल नदी का उल्लेख उत्तराखंड के ग्रामीणों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों के प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान देने वाला है। यह पहल अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है, जहां जल संकट से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है।





