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भारत-बांग्लादेश संबंधों में ‘जन-केंद्रित सहयोग’ पर जोर: उच्चायुक्त प्रणय वर्मा

नई दिल्ली/ढाका। भारत ने बांग्लादेश के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देते हुए ‘जन-केंद्रित सहयोग’ (पीपुल-सेंट्रिक कोऑपरेशन) को प्राथमिकता देने की बात कही है। बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने वहां के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के दौरान दोनों देशों के संबंधों को सकारात्मक, रचनात्मक और भविष्य उन्मुख तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

राजनयिक वार्ता के दौरान भारत की ओर से स्पष्ट किया गया कि दोनों देशों के बीच साझेदारी केवल सरकारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका लाभ सीधे आम नागरिकों तक पहुंचना चाहिए। इस दृष्टिकोण के तहत आर्थिक सहयोग, व्यापार, संपर्क परियोजनाएं, ऊर्जा साझेदारी, शिक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क को संबंधों की मुख्य आधारशिला बताया गया।

बैठक में भारत ने बांग्लादेश की नई सरकार के साथ मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता, विकास और साझा समृद्धि के लिए काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। भारतीय पक्ष ने कहा कि द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करना दोनों देशों के नागरिकों के कल्याण का महत्वपूर्ण माध्यम है और इसी दिशा में आगे बढ़ने की इच्छा जताई गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में भारत-बांग्लादेश संबंध दक्षिण एशिया में सबसे स्थिर और व्यावहारिक साझेदारियों में शामिल रहे हैं। सीमा प्रबंधन, कनेक्टिविटी परियोजनाएं, जलमार्ग, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार विस्तार जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है। ऐसे समय में ‘जन-केंद्रित सहयोग’ की अवधारणा दोनों देशों के रिश्तों को राजनीतिक विमर्श से आगे ले जाकर सामाजिक और आर्थिक साझेदारी में बदलने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

राजनयिक सूत्रों के अनुसार भारत बांग्लादेश के साथ संपर्क परियोजनाओं, सीमा पार व्यापार, डिजिटल सहयोग और कौशल विकास कार्यक्रमों को भी आगे बढ़ाने का इच्छुक है। इससे पूर्व भी भारतीय उच्चायुक्त ने ढाका में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने तथा आपसी विश्वास बढ़ाने पर चर्चा की थी।

विश्लेषकों का कहना है कि भारत की यह रणनीति क्षेत्रीय कूटनीति में ‘पड़ोसी पहले’ नीति को मजबूती देती है। चीन सहित वैश्विक शक्ति संतुलन के बदलते परिदृश्य में भारत और बांग्लादेश के बीच सहयोग को दक्षिण एशिया की स्थिरता और आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, भारत का संदेश स्पष्ट है कि भविष्य के द्विपक्षीय संबंध केवल रणनीतिक या राजनीतिक हितों तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि आम लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने वाले व्यावहारिक सहयोग पर आधारित होंगे।

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