नई दिल्ली। भारत ने वैश्विक समुद्री क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बीआईएमसीओ-आईसीएस सीफेरर वर्कफोर्स रिपोर्ट 2026 के अनुसार, भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा समुद्री नाविक (सीफेरर) आपूर्तिकर्ता बन गया है। इस सूची में भारत ने चीन और रूस को पीछे छोड़ दिया है, जबकि फिलीपींस पहले स्थान पर कायम है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का वैश्विक समुद्री कार्यबल में 12.2 प्रतिशत योगदान है। वर्तमान में देश से 3.11 लाख से अधिक प्रशिक्षित समुद्री पेशेवर दुनिया के विभिन्न जहाजों और समुद्री सेवाओं में कार्यरत हैं। भारतीय नाविकों की बढ़ती संख्या से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग में देश की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस उपलब्धि को देश के समुद्री क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय नाविक अपनी दक्षता, अनुशासन और पेशेवर क्षमता के कारण विश्वभर में पहचान बना रहे हैं। सरकार समुद्री शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जिससे अधिक से अधिक युवाओं को इस क्षेत्र में अवसर मिल सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार, आधुनिक कौशल विकास कार्यक्रमों और सरकारी नीतियों के कारण भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। इससे न केवल भारतीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं, बल्कि विदेशी मुद्रा अर्जन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री परिवहन पर निर्भर है और भविष्य में प्रशिक्षित समुद्री पेशेवरों की मांग और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में भारत के पास इस क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी और मजबूत करने का अवसर है। सरकार का लक्ष्य समुद्री कौशल विकास, प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मानव संसाधन तैयार कर भारत को वैश्विक समुद्री क्षेत्र में अग्रणी देशों की श्रेणी में स्थापित करना है।





