नई दिल्ली | भारत ने पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सेना द्वारा नागरिकों के खिलाफ की जा रही कथित बर्बरताओं और मानवाधिकार उल्लंघनों पर कड़ा विरोध जताया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों का उल्लंघन हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान को इसकी आत्मनिरीक्षण और तत्काल रोकथाम के लिए चेतावनी दी है। मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वह पाकिस्तान पर दबाव बनाए ताकि वहां रह रहे नागरिकों के अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।
भारत ने इस अवसर पर कहा कि पाकिस्तान-नियंत्रित क्षेत्र में नागरिकों के खिलाफ हिंसा और दबाव केवल तनाव बढ़ाने वाला कदम है और यह क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरा है। भारत ने जोर देकर कहा कि PoK में रहने वाले नागरिकों के जीवन, संपत्ति और मौलिक अधिकारों की रक्षा उसकी प्राथमिकता है।
विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि भारत लगातार इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहेगा और पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराने के लिए सभी उपाय अपनाएगा। साथ ही पाकिस्तान पर यह भी दबाव डाला जाएगा कि वह अपने क्षेत्र में मानवाधिकारों का सम्मान करे और किसी भी प्रकार की दमनकारी कार्रवाई बंद करे।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की यह कड़ी प्रतिक्रिया क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और PoK में मानवाधिकार उल्लंघनों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने की रणनीति का हिस्सा है। इससे पाकिस्तान पर वैश्विक स्तर पर दबाव बढ़ने की उम्मीद है।
भारत की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि वह अपने नागरिकों और सीमा क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसी भी कदम से पीछे नहीं हटेगा। यह अपील केवल PoK के नागरिकों की सुरक्षा और पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए है।
संसदीय और कूटनीतिक मंचों पर भी भारत ने इस मुद्दे को उठाते हुए पाकिस्तान की बर्बर कार्रवाई की निंदा की है। भारतीय अधिकारी बार-बार यह संदेश दे रहे हैं कि PoK में मानवाधिकारों का उल्लंघन केवल क्षेत्रीय तनाव बढ़ाता है और इसे अंतरराष्ट्रीय निगरानी में लाया जाना चाहिए।
यह कदम भारत-पाक तनाव, जम्मू-कश्मीर की स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में मानवीय मुद्दों पर भारत की सतत सतर्कता का प्रतीक है।





