नई दिल्ली। भारतीय सेना जल्द ही अत्याधुनिक फ्यूचर इंफैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (FICV) से लैस हो सकती है। करीब 60 हजार करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत सेना के पुराने BMP-2 वाहनों को बदलकर नई पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू वाहन शामिल किए जाएंगे। यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, सेना को लगभग 1,750 से 2,600 नए कॉम्बैट व्हीकल की आवश्यकता है, जो सीमावर्ती इलाकों, रेगिस्तानी क्षेत्रों और ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में प्रभावी ढंग से संचालन कर सकें। इन वाहनों में आधुनिक हथियार प्रणाली, बेहतर सुरक्षा कवच, एंटी-टैंक मिसाइल, डिजिटल कमांड सिस्टम और नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध क्षमता होगी।
जानकारी के मुताबिक, इन वाहनों को विशेष रूप से चीन सीमा के पहाड़ी क्षेत्रों और पाकिस्तान सीमा के रेगिस्तानी इलाकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है। सेना की योजना है कि नए वाहन सैनिकों को तेज गति, बेहतर सुरक्षा और अत्याधुनिक तकनीकी सहायता प्रदान करें।
इस परियोजना में कई भारतीय रक्षा कंपनियां रुचि दिखा रही हैं। निजी और सरकारी क्षेत्र की कंपनियां स्वदेशी तकनीक के साथ इन वाहनों के विकास और निर्माण में भागीदारी कर सकती हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) भी इस परियोजना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि FICV परियोजना भारतीय सेना की युद्ध क्षमता को नई मजबूती देगी और भविष्य की चुनौतियों से निपटने में मददगार साबित होगी। साथ ही इससे देश में रक्षा निर्माण उद्योग को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।





