वाशिंगटन। अमेरिका में स्थायी रूप से बसने और काम करने का सपना देख रहे भारतीय पेशेवरों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर है। अमेरिकी विदेश विभाग ने चेतावनी दी है कि भारतीय नागरिकों के लिए रोजगार आधारित EB-1 ग्रीन कार्ड श्रेणी आने वाले हफ्तों में अस्थायी रूप से अनुपलब्ध हो सकती है। इसकी मुख्य वजह भारतीय आवेदकों की ओर से बढ़ी मांग और उपलब्ध वीजा संख्या का तेजी से इस्तेमाल होना है।
अमेरिकी विदेश विभाग के सितंबर 2026 के वीजा बुलेटिन के अनुसार, यदि भारत के लिए निर्धारित EB-1 सीमा वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले पूरी हो जाती है तो इस श्रेणी में वीजा जारी करना अस्थायी रूप से रोकना पड़ सकता है। वित्त वर्ष 30 सितंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। विभाग ने कहा है कि वीजा संख्या के इस्तेमाल पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत के अनुसार कदम उठाए जाएंगे।
भारतीयों के लिए बढ़ रही मुश्किल
EB-1 श्रेणी में विज्ञान, कला, शिक्षा, कारोबार और अन्य क्षेत्रों में असाधारण क्षमता रखने वाले लोगों के साथ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के वरिष्ठ प्रबंधक और अधिकारी भी शामिल होते हैं। इसे अमेरिका में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रमुख रोजगार आधारित श्रेणियों में माना जाता है।
भारतीय आवेदकों को पहले से ही रोजगार आधारित अन्य श्रेणियों में लंबी प्रतीक्षा का सामना करना पड़ रहा है। EB-2 श्रेणी पर भी दबाव बना हुआ है, जबकि EB-3 में भारतीय आवेदकों के लिए लंबी बैकलॉग स्थिति है। EB-5 निवेशक श्रेणी को लेकर भी उपलब्धता पर दबाव है।
सालाना सीमा बनी बड़ी वजह
अमेरिकी आव्रजन व्यवस्था में रोजगार आधारित वीजा की सालाना संख्या सीमित है। सितंबर 2026 के बुलेटिन के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 के लिए रोजगार आधारित प्राथमिकता वीजा की वैश्विक सीमा 1,86,317 है। भारत समेत अलग-अलग देशों के लिए निर्धारित सीमाओं के कारण अधिक मांग वाले देशों के आवेदकों को लंबे इंतजार का सामना करना पड़ता है।
फिलहाल EB-1 को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने केवल यह चेतावनी दी है कि उपलब्ध सीमा समाप्त होने पर आने वाले हफ्तों में श्रेणी अस्थायी रूप से अनुपलब्ध की जा सकती है। नए वित्त वर्ष की शुरुआत के बाद वीजा उपलब्धता में बदलाव की स्थिति बन सकती है।





