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ब्रह्मकमल टोपी और पहाड़ी बोली: दून में पीएम मोदी ने जीता उत्तराखंडियों का दिल; बोले— “विकास की दौड़ में सबसे आगे होगा देवभूमि”

देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को अपनी 28वीं उत्तराखंड यात्रा के दौरान एक बार फिर साबित कर दिया कि उनका देवभूमि और यहाँ की संस्कृति से कितना गहरा और आत्मीय जुड़ाव है। राजधानी देहरादून में आयोजित विशाल जनसभा में जब प्रधानमंत्री मंच पर पहुँचे, तो उनके पहनावे और संबोधन ने स्थानीय जनता को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्होंने 11,963 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 213 किलोमीटर लंबे दून-दिल्ली एलिवेटेड एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण कर राज्य को विकास की एक नई और तेज रफ्तार सौगात दी।

सांस्कृतिक रंग में रंगे प्रधानमंत्री: ब्रह्मकमल टोपी बनी चर्चा का केंद्र

मंच पर प्रधानमंत्री का स्वागत पारंपरिक वाद्य यंत्रों और नारों के साथ हुआ, लेकिन सबका ध्यान उनके विशेष पहनावे ने खींचा।

  • ब्रह्मकमल टोपी: प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान मानी जाने वाली ब्रह्मकमल टोपी धारण की थी। यह टोपी न केवल उनकी देवभूमि के प्रति श्रद्धा को दर्शाती है, बल्कि स्थानीय शिल्प और विरासत के प्रति उनके सम्मान का प्रतीक भी बनी।
  • अपनत्व का अहसास: पहाड़ी टोपी में प्रधानमंत्री को अपने बीच पाकर जनता ने ‘मोदी-मोदी’ के नारों से पूरे मैदान को गुंजायमान कर दिया।

गढ़वाली और कुमाऊंनी में संबोधन: भाषा से जोड़ा दिल का रिश्ता

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत में ही स्थानीय भाषाओं का उपयोग कर जनसैलाब से सीधा संवाद स्थापित किया।

  • क्षेत्रीय बोलियों का जादू: पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान गढ़वाली और कुमाऊंनी के छोटे-छोटे वाक्यों का प्रयोग किया। उन्होंने पहाड़ी बोली में जब लोगों का हाल-चाल पूछा और देवभूमि की महिमा का गुणगान किया, तो पंडाल में मौजूद हर व्यक्ति तालियां बजाने को मजबूर हो गया।
  • सांस्कृतिक जुड़ाव: भाषा के इस सेतु के माध्यम से उन्होंने यह संदेश दिया कि वे भले ही दिल्ली में बैठते हों, लेकिन उत्तराखंड की धड़कनें उनके करीब रहती हैं।

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