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फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट मामले में आचार्य बालकृष्ण बरी, देहरादून की सीबीआई अदालत ने सुनाया फैसला

देहरादून। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण से जुड़े करीब डेढ़ दशक पुराने फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट मामले में सोमवार को देहरादून की सीबीआई अदालत ने फैसला सुनाते हुए उन्हें बरी कर दिया। मामला भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के लिए कथित फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के आरोपों से जुड़ा था।

सीबीआई के अनुसार, आरोप था कि आचार्य बालकृष्ण ने बरेली स्थित पासपोर्ट कार्यालय में पासपोर्ट बनवाने के लिए खुर्जा के एक संस्कृत महाविद्यालय से जुड़े कथित फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए थे। इस मामले में उनके खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और पासपोर्ट अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी।

2011 में दर्ज हुआ था मामला

मामला वर्ष 2011 में सामने आया था। शिकायत में आचार्य बालकृष्ण की नागरिकता और पासपोर्ट के लिए इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद सीबीआई ने जांच शुरू की। जांच में खुर्जा के एक शिक्षण संस्थान से कथित फर्जी डिग्री हासिल करने का आरोप भी सामने आया था।

सीबीआई ने वर्ष 2016 में इस मामले को लेकर नेपाल सरकार के साथ भी पत्राचार किया था। जांच पूरी होने के बाद आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और पासपोर्ट अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया। शिक्षण संस्थान के तत्कालीन पूर्व प्राचार्य नरेश चंद द्विवेदी के खिलाफ भी धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में चार्जशीट दाखिल की गई थी।

करीब 15 वर्ष पुराने इस मामले की सुनवाई देहरादून स्थित विशेष सीबीआई अदालत में चल रही थी। सोमवार को अदालत के फैसले के साथ ही आचार्य बालकृष्ण को मामले में बड़ी राहत मिली और उन्हें आरोपों से बरी कर दिया गया।

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