नई दिल्ली: शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षकों से बच्चों के विकास को केवल किताबों और पढ़ाई तक सीमित नहीं रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके व्यवहार, रुचियों और रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी ध्यान देना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को अपने लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों के जीवन में केवल पाठ पढ़ाने वाले नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और संरक्षक की भूमिका भी निभाते हैं। बच्चों के बचपन और उनकी रचनात्मकता को बनाए रखना बेहद जरूरी है।
स्क्रीन टाइम पर नजर रखने की सलाह
पीएम मोदी ने बच्चों में बढ़ते अत्यधिक स्क्रीन टाइम को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने शिक्षकों से अभिभावकों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत करने और यह समझने का आग्रह किया कि बच्चे मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों पर कितना समय बिता रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से रात में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर भी ध्यान देने की बात कही।
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि बच्चों को मोबाइल और स्क्रीन से दूर रखने के लिए उन्हें खेल, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कार्यों से जोड़ा जाए। इससे उनके शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
नशे के प्रति भी रहें सतर्क
पीएम मोदी ने शिक्षकों को विद्यार्थियों में नशे की लत के संकेतों पर भी नजर रखने को कहा। उन्होंने कहा कि बड़े शहरों और विश्वविद्यालयों में ऐसी समस्याओं का पता लगाना कई बार मुश्किल होता है। ऐसे में शिक्षकों को बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों को गंभीरता से देखना चाहिए और जरूरत पड़ने पर जागरूकता फैलाने की पहल करनी चाहिए।
उन्होंने शिक्षकों से बच्चों के साथ संवाद बढ़ाने और उन्हें पढ़ाई के साथ जीवन से जुड़े अनुभवों से सीखने का अवसर देने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री का संदेश रहा कि अच्छी शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है।





