नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की विशेष अदालत ने स्वयं को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का प्रभावशाली अधिकारी बताकर लोगों से कथित ठगी करने के आरोपी विजय गुप्ता की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि आरोपी धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 45 के तहत जमानत के लिए निर्धारित आवश्यक शर्तों को पूरा करने में विफल रहा है।
ईडी के अनुसार, विजय गुप्ता पर आरोप है कि उसने खुद को पीएमओ से जुड़ा प्रभावशाली अधिकारी बताकर कई लोगों को सरकारी काम कराने और उच्च स्तर पर पहुंच का दावा करते हुए करोड़ों रुपये की ठगी की। जांच एजेंसी का कहना है कि इस कथित धोखाधड़ी से प्राप्त धन को विभिन्न माध्यमों से छिपाने और वैध दिखाने का प्रयास किया गया, जिसके आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को देखते हुए इस स्तर पर आरोपी को राहत देने का आधार नहीं बनता। न्यायालय ने यह भी माना कि पीएमएलए के तहत जमानत देने के लिए कानून में निर्धारित दोहरी शर्तों का पालन अनिवार्य है और मौजूदा मामले में आरोपी इन शर्तों को संतुष्ट नहीं कर सका।
जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी ने प्रभावशाली पद का झूठा दावा कर लोगों का विश्वास हासिल किया और सरकारी स्तर पर काम कराने का भरोसा देकर बड़ी रकम वसूली। ईडी इस मामले में धन के लेनदेन, बैंक खातों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर रही है।
अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद विजय गुप्ता फिलहाल न्यायिक हिरासत में रहेगा। मामले की सुनवाई विशेष पीएमएलए अदालत में आगे भी जारी रहेगी, जहां ईडी अपनी जांच और साक्ष्य प्रस्तुत करेगी।





