Monday, December 8, 2025

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पार्थ पवार जमीन सौदा विवाद, हाईकोर्ट के जज से कराई जाए न्यायिक जांच: वडेट्टीवार

मुंबई। महाराष्ट्र में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी के भूमि सौदे पर घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक विजय वडेट्टीवार ने इस मुद्दे पर हाईकोर्ट के जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
शनिवार को वडेट्टीवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर इस सौदे की “तटस्थ, स्वतंत्र और विस्तृत जांच” सुनिश्चित करने की बात कही। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा जांच प्रक्रिया केवल “दिखावा” है और सरकार इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह कर रही है।

कांग्रेस नेता का आरोप—सरकार मामले की गंभीरता छिपा रही है
वडेट्टीवार ने कहा कि पार्थ पवार से जुड़ी कंपनी द्वारा पुणे के मुंढवा क्षेत्र में महार जमीन सौदे में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। आरोप है कि जिसकी वास्तविक कीमत करीब 1800 करोड़ रुपये बताई जाती है, उस जमीन को मात्र 300 करोड़ रुपये में खरीदा जा रहा था।
उन्होंने यह भी दावा किया कि जिन दो तहसीलदारों पर कार्रवाई की गई है, वह विवादित भूमि सौदे से संबंधित नहीं है, बल्कि किसी अन्य मामले से जुड़ा निर्णय है। इसे जनता को भ्रमित करने का प्रयास बताया गया।

“सभी अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए”
वडेट्टीवार ने स्पष्ट कहा कि सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त में अगर अनियमितता हुई है तो इसमें शामिल सभी अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “यह अनियमितता कलेक्टर कार्यालय से लेकर नीचे तक के अधिकारियों की संलिप्तता से हुई। ऐसे में कलेक्टर स्वयं जांच समिति का हिस्सा कैसे हो सकते हैं?”
कांग्रेस नेता के अनुसार मौजूदा जांच पैनल विश्वसनीय नहीं है और इसे तत्काल भंग किया जाना चाहिए।

“सरकार किसी को बचाए नहीं” — वडेट्टीवार
वडेट्टीवार ने कहा, “सरकार को किसी को बचाना नहीं चाहिए। हाईकोर्ट के जज से न्यायिक जांच ही इस मामले की सच्चाई सामने ला सकती है।”

अजित पवार ने सौदा रद्द किया, सरकार की जांच समिति सक्रिय
विवाद बढ़ने के बाद उपमुख्यमंत्री अजित पवार पहले ही इस जमीन सौदे को रद्द करने की घोषणा कर चुके हैं।
मahar जमीन की खरीद-फरोख्त से संबंधित नियमों के अनुसार ऐसी किसी भी डील के लिए सरकार से अनुमति आवश्यक होती है। महाराष्ट्र सरकार ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की है, हालांकि उस पर भी विपक्ष सवाल उठा रहा है।

पार्थ पवार से जुड़े इस सौदे को लेकर महाराष्ट्र का राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है और विपक्ष न्यायिक निगरानी की मांग पर अड़ा हुआ है।

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