Sunday, February 8, 2026

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पहाड़ के ‘योद्धा’ का राष्ट्रीय सम्मान: दुर्गम गांव से निकलकर ‘पद्म भूषण’ तक पहुँचे भगत सिंह कोश्यारी; संघर्षों से सफलता का सफर

देहरादून/नई दिल्ली: उत्तराखंड की राजनीति के भीष्म पितामह और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को केंद्र सरकार ने ‘पद्म भूषण’ सम्मान से नवाजने की घोषणा की है। यह सम्मान केवल उनके राजनीतिक कद का नहीं, बल्कि कुमाऊं के एक साधारण गांव से निकलकर देश के सर्वोच्च पदों तक पहुँचने वाले उनके उस जीवट संघर्ष का प्रमाण है, जिसने उन्हें ‘पहाड़ का योद्धा’ बनाया। सार्वजनिक जीवन में उनके अद्वितीय योगदान और समर्पण के लिए उन्हें देश के इस प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान के लिए चुना गया है।

दुर्गम पहाड़ियों से शुरू हुआ सफर

भगत सिंह कोश्यारी का जन्म बागेश्वर जिले के एक छोटे और बेहद दुर्गम गांव नामती चेताबगड़ में हुआ था।

  • साधारण पृष्ठभूमि: एक किसान परिवार में जन्मे कोश्यारी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अभावों के बीच पूरी की। वह कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाया करते थे, जिसने उनमें बचपन से ही अनुशासन और संघर्ष की नींव डाली।
  • शिक्षक से राजनेता तक: राजनीति में आने से पहले उन्होंने एक शिक्षक के रूप में कार्य किया। उनके सरल स्वभाव और कुशाग्र बुद्धि के कारण लोग उन्हें आज भी सम्मान से ‘दाज्यू’ (बड़े भाई) कहकर पुकारते हैं।

उत्तराखंड राज्य निर्माण के सूत्रधार

कोश्यारी का नाम उत्तराखंड के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।

  1. राज्य आंदोलन: पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर हुए आंदोलन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  2. नेतृत्व क्षमता: वह उत्तराखंड के दूसरे मुख्यमंत्री बने और राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा दी। उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में जाना जाता है जो सत्ता के गलियारों में रहकर भी अपनी पहाड़ी जड़ों और संस्कृति से कभी दूर नहीं हुए।

विवादों और चुनौतियों के बीच अडिग व्यक्तित्व

भगत सिंह कोश्यारी का राजनीतिक जीवन हमेशा चुनौतियों भरा रहा है। राज्यसभा सदस्य से लेकर महाराष्ट्र के राज्यपाल के पद तक, उन्होंने कई कठिन राजनीतिक परिस्थितियों का सामना किया।

  • संवैधानिक मर्यादा: महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल काफी चर्चा में रहा, जहाँ उन्होंने कई महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय लिए।
  • सादगी की मिसाल: राज्यपाल जैसे उच्च पद पर रहते हुए भी उन्होंने राजभवन में ‘पहाड़ी टोपी’ और अपनी सादगी को अपनी पहचान बनाए रखा।

पद्म भूषण: उत्तराखंड के लिए गर्व का क्षण

कोश्यारी को पद्म भूषण मिलने की खबर मिलते ही समूचे उत्तराखंड में खुशी की लहर दौड़ गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई दिग्गजों ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान प्रदेश के हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो संघर्ष के दम पर अपनी पहचान बनाना चाहता है।

“यह सम्मान मेरे लिए नहीं, बल्कि देवभूमि की उस मिट्टी के लिए है जिसने मुझे पाल-पोसकर बड़ा किया। मैं जीवन के अंतिम क्षण तक जनता की सेवा में समर्पित रहूँगा।” — भगत सिंह कोश्यारी (प्रतिक्रिया)

समाज सेवा और लेखन में भी अग्रणी

राजनीति के अलावा कोश्यारी एक प्रखर लेखक और पत्रकार भी रहे हैं। उन्होंने ‘पर्वत पीयूष’ जैसी पत्रिका का संपादन किया और कई पुस्तकों के माध्यम से पहाड़ की समस्याओं और संस्कृति को विश्व पटल पर रखा। उनकी बौद्धिक क्षमता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रति उनकी निष्ठा ने उन्हें एक सुलझा हुआ विचारक बनाया है।

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