देहरादून। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों की छात्राओं को महाविद्यालय आने-जाने के लिए मुफ्त परिवहन सुविधा का इंतजार अब भी जारी है। उच्च शिक्षा विभाग ने छात्राओं की कॉलेजों में उपस्थिति बढ़ाने और उन्हें उच्च शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से गेम चेंजर योजना के तहत मुफ्त परिवहन का प्रस्ताव तैयार किया था, लेकिन करीब एक साल बाद भी योजना धरातल पर नहीं उतर पाई है।
सरकार की ओर से पहले कहा गया था कि छात्राओं के परिवहन खर्च का वहन किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह था कि दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाली प्रतिभावान बेटियां केवल आने-जाने की सुविधा के अभाव में उच्च शिक्षा से वंचित न रहें। हालांकि, अभी तक छात्राओं को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, महाविद्यालयों में प्रवेश लेने वाली छात्राओं की तुलना में प्रतिदिन कॉलेज पहुंचने वाली छात्राओं की संख्या काफी कम है। परिवहन सुविधा की कमी को इसके प्रमुख कारणों में माना जा रहा है। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में कई छात्राओं को कॉलेज पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे नियमित उपस्थिति प्रभावित होती है।
कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव
सचिव उच्च शिक्षा बीवीआरसी पुरुषोत्तम के अनुसार, छात्राओं को मुफ्त परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के संबंध में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसे जल्द कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद योजना को लागू करने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मुफ्त परिवहन सुविधा लागू होने से पर्वतीय क्षेत्रों की छात्राओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल कॉलेजों में उनकी नियमित उपस्थिति बढ़ सकती है, बल्कि आर्थिक और भौगोलिक चुनौतियों के कारण उच्च शिक्षा से दूर रहने वाली बेटियों को भी आगे पढ़ने का अवसर मिल सकेगा।
फिलहाल छात्राओं और उनके परिवारों की नजर सरकार के आगामी फैसले पर टिकी है।





