नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के सेंट्रल रिज से बाहरी और आक्रामक प्रजातियों के पेड़ों को हटाने की अनुमति दे दी है। करीब 70 हेक्टेयर क्षेत्र में बचे 13,161 आक्रामक पेड़ों को हटाकर उनकी जगह नीम, बरगद, पीपल, जामुन और अमलतास जैसी देशी प्रजातियां लगाने की योजना है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली सरकार के वन विभाग को यह काम दिल्ली इको-रिस्टोरेशन प्लान 2026-30 के तहत करने का निर्देश दिया है। पूरी प्रक्रिया की निगरानी दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड करेगा। साथ ही, देहरादून स्थित फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI) विशेषज्ञों की टीम गठित कर योजना के क्रियान्वयन की जांच करेगा।
विलायती कीकर और यूकेलिप्टस हटेंगे
वन विभाग का कहना है कि विलायती कीकर (Prosopis juliflora), बबूल और यूकेलिप्टस जैसी प्रजातियां सेंट्रल रिज में देशी वनस्पतियों के विकास में बाधा बन रही हैं। इन्हें हटाकर स्थानीय प्रजातियों को बढ़ावा दिया जाएगा। कोर्ट ने भी इस तर्क को स्वीकार करते हुए इन पेड़ों को हटाने की अनुमति दी।
वन विभाग के अनुसार, वर्ष 2026-27 की योजना के तहत 191 हेक्टेयर क्षेत्र से 22,188 आक्रामक पेड़ों को हटाकर करीब 7.29 लाख पेड़ और झाड़ियां लगाने का लक्ष्य है। अब तक लगभग 9,000 पेड़ हटाए जा चुके हैं और करीब 5.31 लाख पेड़ व झाड़ियां लगाई जा चुकी हैं।
मिट्टी को नुकसान पर भी चिंता
सुनवाई के दौरान पेड़ों को उखाड़ने की प्रक्रिया में ऊपरी उपजाऊ मिट्टी को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई गई। कोर्ट ने इस चिंता को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों की निगरानी में काम कराने पर जोर दिया है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद वन विभाग को अनुपालन रिपोर्ट भी दाखिल करनी होगी।





