चेन्नई। तमिलनाडु पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्यभर में 48 घंटे का विशेष अभियान चलाया। छह और सात अगस्त को चलाए गए इस अभियान में साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल बैंक खातों से जुड़े 837 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इस दौरान 601 एफआईआर से जुड़े मामलों में कार्रवाई की और 157 नए मामले भी दर्ज किए।
म्यूल बैंक खाते ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराध से हासिल रकम को प्राप्त करने, दूसरे खातों में भेजने या नकद निकालने के लिए किया जाता है। पुलिस के अनुसार, कुछ लोग कमीशन या आर्थिक लाभ के बदले अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते हैं। ऐसे खातों के जरिये ठगी की रकम का स्रोत छिपाने का प्रयास किया जाता है।
पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज शिकायतों और वित्तीय लेनदेन के आंकड़ों का विश्लेषण कर संदिग्ध लोगों की पहचान की। कार्रवाई के दौरान 9,804 साइबर अपराध शिकायतों से जुड़े संदिग्धों की जांच की गई। पुलिस के अनुसार, इन मामलों में करीब 545.27 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन से संबंध सामने आया।
अभियान के दौरान पुलिस ने 204 मोबाइल फोन, 185 सिम कार्ड, चार लैपटॉप/डेस्कटॉप, 114 बैंक पासबुक, 29 चेकबुक और 73 एटीएम/डेबिट कार्ड समेत अन्य सामान बरामद किया। करीब 1.02 लाख रुपये नकद भी जब्त किए गए। इसके अलावा 155 मोबाइल नंबर और 58 बैंक खातों से संबंधित जानकारियां आगे की जांच के लिए जुटाई गईं।
पुलिस अब जब्त डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों के आधार पर साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
तमिलनाडु पुलिस ने लोगों को चेताया है कि वे कमीशन या किसी अन्य लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम या बैंकिंग जानकारी किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें। पुलिस के मुताबिक, खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी में होने पर खाताधारक भी कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकता है।
साइबर ठगी का शिकार होने पर नागरिकों से तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करने और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है।





