नई दिल्ली। केंद्र सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बढ़ते डीपफेक और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को लेकर सख्त रुख अपना रही है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय इस सप्ताह मेटा की टीम के साथ बैठक कर प्लेटफॉर्म पर हानिकारक कंटेंट की रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगा।
बैठक में मुख्य रूप से डीपफेक सामग्री, आपत्तिजनक पोस्ट और बच्चों को ऑनलाइन होने वाले नुकसान से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। सरकार यह जानना चाहती है कि मेटा ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए अब तक क्या कदम उठाए हैं और उनकी प्रभावशीलता कितनी रही है।
डीपफेक तकनीक के जरिए तस्वीरों, वीडियो और आवाज में कृत्रिम बदलाव कर भ्रामक सामग्री तैयार की जा सकती है। सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री के तेजी से प्रसार को लेकर सरकार और सुरक्षा एजेंसियां लगातार चिंता जताती रही हैं। विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और सार्वजनिक हस्तियों से जुड़ी आपत्तिजनक या भ्रामक सामग्री गंभीर चुनौती बन रही है।
मंत्रालय की मेटा के साथ होने वाली बैठक को इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसमें प्लेटफॉर्म की कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था और हानिकारक सामग्री की पहचान तथा उसे हटाने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की जा सकती है।
सरकार का जोर सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ-साथ यूजर्स के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार करने पर है। आने वाले समय में समीक्षा के आधार पर प्लेटफॉर्म से अतिरिक्त कदम उठाने की अपेक्षा भी की जा सकती है।





