बिहार के बाद अब पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में मतदाता सूची के संशोधन को लेकर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और चुनाव आयोग आमने-सामने आ गए हैं। टीएमसी ने आरोप लगाया है कि SIR के दौरान अत्यधिक दबाव और अमानवीय समय सीमा के कारण 40 बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की मौत हुई है और इसकी जिम्मेदारी सीधे चुनाव आयोग और उसके प्रमुख ज्ञानेश कुमार पर है। टीएमसी ने यह भी कहा कि “चुनाव आयोग के हाथ खून से रंगे हैं।”
चुनाव आयोग ने आरोपों को ठुकराया
टीएमसी के गंभीर आरोपों पर चुनाव आयोग ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इन्हें “पूरी तरह निराधार, असत्य और राजनीति से प्रेरित” बताया है। आयोग ने कहा कि SIR प्रक्रिया पूरी तरह चुनावी कानूनों के तहत चल रही है और राजनीतिक दलों का कर्तव्य है कि वे कानून का पालन करें, न कि गलत आरोपों से माहौल बिगाड़ें।
बैठक में आरोपों की बौछार, टीएमसी ने कही यह बात
निर्वाचन विभाग की एक बैठक के दौरान टीएमसी नेताओं ने आयोग के शीर्ष अधिकारी ज्ञानेश कुमार पर यह आरोप लगाया कि अमानवीय कार्य समय और अत्यधिक दबाव के कारण BLO की मौतें हुई हैं। टीएमसी का दावा है कि यह पूरा पुनरीक्षण अभियान बंगाली और अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं को सूची से हटाने की “बीजेपी की साजिश” का हिस्सा है।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि बैठक के दौरान उनके सवालों का जवाब देने से आयोग ने इनकार कर दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि आयोग का रवैया पक्षपातपूर्ण है और वह राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है।
आयोग ने सफाई दी—उद्देश्य फर्जी प्रविष्टियों को हटाना
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 326 के मुताबिक केवल भारतीय नागरिक ही मतदाता बन सकते हैं। इसलिए सत्यापन अभियान का उद्देश्य फर्जी और अयोग्य प्रविष्टियों को हटाना है, जिसमें विदेशी नागरिकों के नाम भी शामिल हैं। आयोग ने कहा कि प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुरूप चल रही है।
बैठक के बाद आयोग की प्रतिक्रिया
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, डेरेक ओ’ब्रायन की अगुवाई में टीएमसी के दस सदस्यीय दल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की। इसके बाद आयोग के आधिकारिक सूत्रों ने बयान जारी कर कहा कि टीएमसी के आरोप “निराधार और राजनीतिक मकसद से प्रेरित” हैं।
BLO की सुरक्षा के निर्देश
आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल पुलिस महानिदेशक (DGP) और कोलकाता पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि सभी क्षेत्रीय चुनावकर्मियों को तत्काल सुरक्षा दी जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता द्वारा BLO को धमकाया न जाए और न ही उन पर दबाव बनाया जाए।
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया पर मचे इस राजनीतिक तूफान ने राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। अब सभी की निगाहें आयोग की आगे की कार्रवाइयों और टीएमसी की अगली रणनीति पर टिकी हैं।





