जोशीमठ/बदरीनाथ: भू-वैकुंठ भगवान बदरीविशाल के कपाट खुलने की प्रक्रिया अपने अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर गई है। मंगलवार को शीतकालीन प्रवास स्थल जोशीमठ के नृसिंह मंदिर से आदि गुरु शंकराचार्य की पवित्र गद्दी, गाडू घड़ा (तेल कलश) और भगवान गरुड़ की डोली पूरे विधि-विधान के साथ बदरीनाथ धाम के लिए रवाना हुई। इस अवसर पर पूरा जोशीमठ क्षेत्र ‘जय बदरी विशाल’ के गगनभेदी उद्घोषों से गुंजायमान रहा और श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।
नृसिंह मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना
यात्रा के प्रस्थान से पूर्व जोशीमठ स्थित नृसिंह मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया था।
- विशिष्ट अभिषेक: मंदिर के मुख्य पुजारियों द्वारा आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी और भगवान के अभिषेक के लिए प्रयुक्त होने वाले पवित्र गाडू घड़े की विशेष पूजा-अर्चना की गई।
- परंपरा का निर्वहन: टिहरी राजघराने से आए इस तेल कलश (गाडू घड़ा) को बदरीनाथ धाम ले जाने की परंपरा सदियों पुरानी है, जिसमें भगवान के अभिषेक के लिए तिल का तेल ले जाया जाता है।
सेना के बैंड और भजनों की मधुर स्वरलहरी
डोली प्रस्थान के समय वातावरण अत्यंत भावुक और भक्तिपूर्ण हो गया था।
- भक्तिमय माहौल: स्थानीय महिलाओं द्वारा गाए जा रहे भगवान बदरी विशाल के पारंपरिक भजनों और सेना के बैंड की मधुर धुनों ने नृसिंह मंदिर क्षेत्र को पूरी तरह शिव-विष्णु की भक्ति में डुबो दिया।
- पुष्प वर्षा: जैसे ही आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी और गरुड़ की डोली मंदिर परिसर से बाहर निकली, श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर बाबा का भव्य स्वागत किया।
धाम पहुँचने का मार्ग और सुरक्षा
यह पवित्र काफिला जोशीमठ से प्रस्थान कर पांडुकेश्वर पहुँचेगा, जहाँ रात्रि विश्राम के बाद अगले पड़ाव की ओर बढ़ेगा।
- पांडुकेश्वर में संगम: पांडुकेश्वर के योगध्यान बदरी मंदिर से भगवान कुबेर और उद्धव जी की डोली भी इस यात्रा में सम्मिलित होगी, जिसके बाद सभी डोलियाँ संयुक्त रूप से बदरीनाथ धाम पहुँचेंगी।
- सुरक्षा के कड़े प्रबंध: यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं। सीमा सड़क संगठन (BRO) ने भी बदरीनाथ हाईवे को सुचारू रखने के लिए अतिरिक्त मशीनों की तैनाती की है।
कपाट खुलने का शुभ मुहूर्त
बदरीनाथ धाम के कपाट आगामी दिनों में ब्रह्म मुहूर्त में पूरे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खोले जाएंगे। कपाट खुलने के साथ ही भगवान बदरी विशाल के अभिषेक की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें आज रवाना हुआ गाडू घड़ा (तेल कलश) मुख्य भूमिका निभाएगा। बदरी-केदार मंदिर समिति ने बताया कि धाम में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और यात्रियों के स्वागत के लिए बदरीपुरी को भव्य रूप से सजाया जा रहा है।





