श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में मंगलवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। श्रीनगर से लोकसभा सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) से इस्तीफा देने के साथ ही लोकसभा की सदस्यता भी छोड़ दी। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर चुनावी वादों से पीछे हटने और जनता के भरोसे को तोड़ने का आरोप लगाया है। उनके इस फैसले से जम्मू-कश्मीर की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
रुहुल्लाह मेहदी ने मध्य कश्मीर के बडगाम जिले स्थित बेहिश्त-ए-जहरा पार्क में अपने समर्थकों की सभा को संबोधित करते हुए इस्तीफे का ऐलान किया। यह कार्यक्रम उनके पिता आगा सैयद मेहदी की 26वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित किया गया था। उन्होंने अपना इस्तीफा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी भेज दिया है।
अनुच्छेद 370 पर पार्टी नेतृत्व को घेरा
मेहदी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 2024 के विधानसभा चुनावों के दौरान जनता से किए गए प्रमुख वादों को पूरा नहीं किया। इनमें अनुच्छेद 370 की बहाली, जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने जैसे मुद्दे शामिल थे।
उन्होंने कहा कि पार्टी ने चुनाव के दौरान लोगों से बड़े वादे किए, लेकिन सत्ता में आने के बाद अपने मूल एजेंडे से पीछे हट गई। मेहदी ने इसे जनता के साथ विश्वासघात करार दिया और कहा कि वह ऐसी राजनीति का हिस्सा नहीं रह सकते।
नई राजनीतिक पार्टी बनाने के दिए संकेत
नेशनल कॉन्फ्रेंस छोड़ने के बाद मेहदी ने जम्मू-कश्मीर में नए राजनीतिक विकल्प की जरूरत बताई। उन्होंने संकेत दिया कि वह समान विचारधारा वाले ईमानदार और प्रतिबद्ध लोगों को साथ लेकर नई राजनीतिक पहल कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी नई पार्टी के गठन की घोषणा नहीं की गई है।
मेहदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपने राजनीतिक अधिकारों और सम्मान के लिए एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। उन्होंने कहा कि अब दिल्ली से बातचीत जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी शर्तों पर करेंगे।
गौरतलब है कि रुहुल्लाह मेहदी लंबे समय से पार्टी नेतृत्व की नीतियों की आलोचना कर रहे थे। उनके इस्तीफे को नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।





