हल्द्वानी। दीपक रावत ने कैम्प कार्यालय हल्द्वानी में आयोजित जनता मिलन कार्यक्रम में आमजन की समस्याएं सुनीं और कई मामलों का मौके पर ही समाधान कराया। कार्यक्रम में भूमि विवाद, सड़क निर्माण, भू-अभिलेखों में त्रुटियां, पेयजल एवं विद्युत संबंधी शिकायतें प्रमुख रूप से सामने आईं। आयुक्त ने जनहित से जुड़े मामलों में लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।
जनता मिलन के दौरान हल्द्वानी निवासी ईश्वरी दत्त ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके पिता की मृत्यु के बाद चार भाइयों के बीच भूमि के कुर्रे (फाट) का आदेश उपजिलाधिकारी कार्यालय से लगभग नौ माह पूर्व पारित हो चुका है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर आयुक्त दीपक रावत ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए उपजिलाधिकारी हल्द्वानी को तलब किया और निर्देश दिए कि सभी लंबित कुर्रे मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि एसडीएम कोर्ट से धारा 176 के तहत आदेश पारित होने के बावजूद लेखपालों द्वारा विलंब किया जाना गंभीर लापरवाही है। आदेशों की अवहेलना करने वाले लेखपालों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
कार्यक्रम में बैलपड़ाव निवासी उमा देवी ने शिकायत की कि उनके बेटों ने उनकी अनुसूचित जाति की भूमि एक सामान्य वर्ग के व्यक्ति को बेच दी, जिस पर निर्माण कार्य भी कराया जा चुका है। इस पर आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि एससी-एसटी की कृषि भूमि सामान्य या अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग बिना प्रशासनिक अनुमति के नहीं खरीद सकते। ऐसा करना दंडनीय अपराध है और बिना अनुमति की गई रजिस्ट्री को कभी भी निरस्त किया जा सकता है। उन्होंने उपजिलाधिकारी रामनगर को मामले की विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
वीरभट्टी-छिड़ा मार्ग निर्माण को लेकर ग्राम सभा छिड़ा के निवासियों ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए धनराशि आवंटित हो चुकी है, लेकिन वन विभाग की आपत्तियों के कारण कार्य शुरू नहीं हो पाया। गांव में लगभग 25 परिवार निवास करते हैं। इस पर आयुक्त ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता से दूरभाष पर वार्ता कर वन विभाग की आपत्तियों का शीघ्र निस्तारण कर सड़क निर्माण शुरू कराने के निर्देश दिए।
हल्द्वानी निवासी विपिन चन्द्र ने शिकायत की कि उनके भू-अभिलेख खतौनी में उनका नाम गलत दर्ज हो गया है। इस पर आयुक्त ने संबंधित उपजिलाधिकारी को नियमानुसार कार्रवाई कर त्रुटि सुधारने के निर्देश दिए।
रामनगर निवासी नितिन ढोमणे ने शिकायत की कि उन्होंने धोखाधड़ी का शिकार होकर नजूल भूमि खरीद ली थी और अपनी धनराशि व भूखंड वापस दिलाने की मांग की। मामले को गंभीरता से लेते हुए आयुक्त ने निर्देश दिए कि संबंधित विक्रेता द्वारा शिकायतकर्ता को भूमि का विक्रय मूल्य शीघ्र लौटाया जाए। यदि तत्काल भुगतान संभव न हो तो चेक उपलब्ध कराया जाए। साथ ही संबंधित पटवारी को निर्देश दिए गए कि सभी नजूल भूमि पर प्रमुख स्थानों पर सूचना पट्ट लगाए जाएं, जिन पर स्पष्ट लिखा हो— “यह भूमि सरकार की निजी संपत्ति है, इसका क्रय-विक्रय दंडनीय अपराध है।”
आयुक्त दीपक रावत ने कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी शिकायतों का पारदर्शी एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।





