नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट के नए भवन के निर्माण के लिए प्रस्तावित गौलापार क्षेत्र की जमीन एक बार फिर चर्चा में है। हल्द्वानी के बेलबाबा क्षेत्र में प्रस्तावित हाईकोर्ट परिसर के लिए करीब 4238 पेड़ों के कटान की संभावना जताई जा रही है। पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील इस क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने के लिए गौलापार क्षेत्र में भूमि चिह्नित की गई है। इससे पहले भी गौलापार की प्रस्तावित जमीन को लेकर पर्यावरणीय मुद्दे उठे थे। हाईकोर्ट ने वर्ष 2024 में कहा था कि 26 हेक्टेयर भूमि का बड़ा हिस्सा पेड़ों से घिरा है और विकास के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों को हटाना उचित नहीं होगा।
अब नए भवन निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही वन क्षेत्र और पेड़ों के संरक्षण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रस्तावित परिसर के लिए आवश्यक भूमि को विकसित करने में बड़ी संख्या में पेड़ों को हटाने की जरूरत पड़ सकती है। पर्यावरणविदों का मानना है कि तराई क्षेत्र की हरियाली और जैव विविधता को देखते हुए निर्माण योजना में संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
गौलापार क्षेत्र में हाईकोर्ट भवन निर्माण का प्रस्ताव लंबे समय से लंबित है। नैनीताल में वर्तमान हाईकोर्ट परिसर में जगह की कमी और बढ़ते प्रशासनिक दबाव को देखते हुए नए परिसर की आवश्यकता बताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हाईकोर्ट को हल्द्वानी में स्थानांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया है और राज्य सरकार को संबंधित भूमि हस्तांतरित करने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान पर्यावरण संरक्षण को महत्व देते हुए कहा था कि हरियाली को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। इससे पहले उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी पेड़ों की कटाई से जुड़े मामले में विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया था।
अब प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने चुनौती है कि हाईकोर्ट जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के लिए आधुनिक सुविधाओं वाला परिसर तैयार किया जाए, लेकिन इसके साथ ही पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहे। आने वाले दिनों में भूमि हस्तांतरण, वन अनुमति और निर्माण योजना को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होगी।





