Sunday, February 15, 2026

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गणतंत्र दिवस परेड: कर्तव्य पथ पर दिखी ‘नए भारत’ की न्याय व्यवस्था; गृह मंत्रालय की झांकी ने पेश किए नए आपराधिक कानून

नई दिल्ली: देश के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य परेड में केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इस वर्ष मंत्रालय ने औपनिवेशिक काल के पुराने कानूनों को पीछे छोड़ते हुए भारत की ‘सजा से न्याय’ की ओर बढ़ती यात्रा को प्रदर्शित किया। झांकी के माध्यम से देश के तीन नए आपराधिक कानूनों—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम—को एक आधुनिक, तकनीक-आधारित और नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था के रूप में पेश किया गया।

झांकी का मुख्य आकर्षण: ‘दण्ड से न्याय की ओर’

गृह मंत्रालय की इस झांकी का मूल विषय (Theme) “दण्ड से न्याय की ओर” था। झांकी के केंद्र में नए संसद भवन का प्रतिरूप और उसके ऊपर स्थापित तीन विशाल पुस्तकें थीं, जो इन नए कानूनों की सर्वोच्चता और आधुनिकता को दर्शा रही थीं।

  • डिजिटल बदलाव: झांकी में ई-साक्ष्य (e-Sakshya), ई-सम्मन और एनएएफआईएस (NAFIS – नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) जैसे तकनीकी उपकरणों को प्रमुखता से दिखाया गया।
  • त्वरित प्रतिक्रिया: झांकी के साथ चल रही मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट और प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मियों की टुकड़ी ने यह संदेश दिया कि नई व्यवस्था में अपराध स्थल पर जांच और साक्ष्य संकलन अब अधिक पेशेवर और समयबद्ध होगा।

अमित शाह का बयान: “औपनिवेशिक निशानियों से मुक्ति का संकेत”

झांकी के प्रदर्शन के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने 100 साल बाद अपने आपराधिक कानूनों में सबसे बड़ा बदलाव देखा है।

“गृह मंत्रालय की झांकी ने उन ऐतिहासिक कानूनी सुधारों को मूर्त रूप दिया है जिन्होंने औपनिवेशिक काल के अवशेषों को मिटा दिया है। यह झांकी एक ऐसी न्याय प्रणाली का प्रतीक है जो ‘दंड-प्रधान’ नहीं, बल्कि ‘न्याय-प्रधान’ है। यह विकसित भारत की आकांक्षाओं को दर्शाता है।” — अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री

तकनीक और समावेशिता का संगम

झांकी में न्याय प्रणाली के विभिन्न पहलुओं को बेहद बारीकी से दर्शाया गया:

  1. बहुभाषी कानून: कानून की किताबों को कई भारतीय भाषाओं में प्रदर्शित किया गया, जो सरकार की समावेशी और पारदर्शी न्याय व्यवस्था की मंशा को प्रकट करता है।
  2. वर्चुअल सुनवाई: झांकी ने तकनीक-संचालित अदालतों और वर्चुअल सुनवाई के मॉडल को भी दिखाया, जिससे अदालती कार्यवाही में लगने वाला समय कम होगा।
  3. सुधारात्मक न्याय: पहली बार ‘सामुदायिक सेवा’ (Community Service) को एक सजा के रूप में शामिल करने के प्रावधान को भी झांकी में जगह मिली, जो न्याय के प्रति एक मानवीय दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है।

 

गृह मंत्रालय के अनुसार, 1 जुलाई 2024 से देशभर में लागू हुए ये कानून अब पूरी तरह से क्रियान्वित हो चुके हैं। झांकी के माध्यम से आम नागरिकों को यह विश्वास दिलाया गया कि नई व्यवस्था में पीड़ितों के अधिकारों का संरक्षण प्राथमिकता है और तकनीक के उपयोग से न्याय अब और अधिक सुलभ, सटीक और तेज होगा।

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