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गंगा की औद्योगिक प्रदूषण में 60% की कमी, ‘नमामि गंगे’ योजना सफल

नई दिल्ली। केंद्रीय जल मंत्री ने घोषणा की है कि ‘नमामि गंगे’ योजना के तहत गंगा नदी में औद्योगिक प्रदूषण पिछले 6 वर्षों में लगभग 60 प्रतिशत कम हुआ है। यह आंकड़ा 2017 के स्तर की तुलना में हासिल किया गया है और इसे नदी संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है।

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, योजना के तहत औद्योगिक क्षेत्रों में कड़ी निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण उपाय किए गए। गंगा किनारे स्थित फैक्ट्रियों में effluent treatment plants (ईटीपी) की स्थापना और नियमित निरीक्षण के कारण अब नदी में औद्योगिक अपशिष्ट का स्तर काफी घट गया है।

जल मंत्री ने कहा, “नमामि गंगे मिशन ने प्रदूषण घटाने और गंगा की साफ-सफाई सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह हमारी नीतियों और औद्योगिक भागीदारों की जिम्मेदारी के सकारात्मक परिणाम हैं।”

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुधार गंगा नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है। शुद्ध पानी और कम रासायनिक अपशिष्ट से नदी में जैव विविधता बनी रहती है और मछलियों सहित अन्य जलीय जीव सुरक्षित रहते हैं।

‘नमामि गंगे’ योजना के तहत सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट, सीवेज ट्रीटमेंट, औद्योगिक अपशिष्ट नियंत्रण और जन जागरूकता कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी गई है। योजना के कार्यान्वयन के दौरान राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के सहयोग से लगभग सभी प्रमुख नदियों में जल गुणवत्ता में सुधार देखा गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा में बैक्टीरियल प्रदूषण और रासायनिक अपशिष्ट के स्तर में भी कमी आई है। इससे न केवल नदी तटवर्ती क्षेत्रों में जीवन सुधार रहा है, बल्कि धार्मिक स्थलों और पर्यटक स्थलों पर आने वाले लोगों के लिए भी साफ-सुथरी नदी उपलब्ध हुई है।

सरकार ने यह भी बताया कि योजना के अगले चरण में औद्योगिक इकाइयों में नई तकनीकों के माध्यम से अपशिष्ट प्रबंधन और जल शुद्धिकरण को और प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस उपलब्धि की सराहना की है और इसे एक बड़ी प्रगति मानते हुए कहा कि निरंतर निगरानी और सामूहिक प्रयास से गंगा की सफाई और स्वच्छता सुनिश्चित की जा सकती है।

नदी के संरक्षण में मिली यह सफलता न केवल पर्यावरण हित में है, बल्कि लोगों में जल संरक्षण और जागरूकता की भावना भी बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘नमामि गंगे’ मिशन की निरंतरता से गंगा को आने वाले वर्षों में पूरी तरह स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाना संभव है।

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