नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ‘खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम’ देश के खेल सामग्री निर्माण उद्योग के लिए गेम चेंजर साबित होगी। इससे भारत की वैश्विक बाजार में स्थिति मजबूत होगी और घरेलू स्तर पर खेल उपकरणों के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर से योजना को मंजूरी दिए जाने का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत खेल सामग्री के निर्माण के लिए विशेष विनिर्माण क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। इससे उद्योग में निवेश बढ़ाने और भारतीय कंपनियों को आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे।
एमएसएमई और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा
योजना में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सहयोग देने के साथ अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे खेल सामग्री की गुणवत्ता बेहतर बनाने और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, इस पहल से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और खेल सामग्री के निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, यह योजना ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
1,856 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान
खेल सामग्री उद्योग को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2026 से 2033-34 तक की अवधि के लिए लगभग 1,856.67 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना और भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना है।
योजना के माध्यम से विनिर्माण इकाइयों, मौजूदा औद्योगिक समूहों और संबंधित सुविधाओं को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। इससे छोटे और बड़े उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में भी मदद मिल सकती है।
कंटेनर निर्माण को भी मिलेगा प्रोत्साहन
प्रधानमंत्री ने कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम को मंजूरी मिलने का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे देश के समुद्री व्यापार और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
इस योजना के तहत कंटेनर निर्माण की घरेलू क्षमता को बढ़ाकर सालाना 7.5 लाख टीईयू तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे आयात पर निर्भरता कम करने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकार की इन पहलों का उद्देश्य विनिर्माण क्षेत्र को गति देना, रोजगार बढ़ाना और वैश्विक बाजार में भारत की भागीदारी मजबूत करना है।





