केदारनाथ/रुद्रप्रयाग: विश्व प्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान श्री केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार को ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए। प्रातः 8 बजे शुभ मुहूर्त में मंदिर के मुख्य द्वार खुलते ही हिमालय की गोद में बसी केदारपुरी ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय बाबा केदार’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठी। इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण के साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे। कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध चारधाम यात्रा का विधिवत आगाज़ हो गया है।
वैदिक मंत्रोच्चार और परंपराओं का निर्वहन
बाबा केदार के कपाट उद्घाटन की प्रक्रिया तड़के से ही शुरू हो गई थी।
- विधि-विधान: मुख्य पुजारी और वेदपाठियों ने विधि-विधान और पौराणिक परंपराओं के साथ पूजा-अर्चना की।
- पीएम मोदी के नाम पहली पूजा: मंदिर के द्वार खुलने के पश्चात सबसे पहली विशेष पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से संपन्न की गई। यह पूजा राष्ट्र की उन्नति और जन-कल्याण की भावना के साथ की गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लिया आशीर्वाद
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी पत्नी गीता धामी के साथ इस पावन अवसर पर केदारनाथ धाम पहुंचे।
- विशेष पूजा-अर्चना: मुख्यमंत्री ने सपरिवार बाबा केदार का जलाभिषेक किया और मंदिर के भीतर विशेष प्रार्थना की।
- प्रदेश की खुशहाली की कामना: दर्शन के उपरांत सीएम धामी ने समस्त प्रदेशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी तीर्थयात्रियों की सुगम और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह संकल्पित है।
भक्तिमय हुआ वातावरण: पुष्प वर्षा और सेना का बैंड
कपाट उद्घाटन समारोह को भव्य बनाने के लिए मंदिर को कई टन फूलों से सजाया गया था।
- पुष्प वर्षा: जब कपाट खुले, तब आसमान से हेलीकॉप्टर द्वारा मंदिर और श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा की गई, जिससे भक्तों का उत्साह चरम पर पहुँच गया।
- सुरों की गूंज: भारतीय सेना के बैंड की मधुर धुनों और स्थानीय ढोल-दमाऊ की थाप ने पूरे केदारनाथ परिसर को एक अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
श्रद्धालुओं का हुजूम और सुरक्षा व्यवस्था
कपाट खुलने के पहले ही दिन धाम में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा।
- हजारों भक्त मौजूद: कड़ाके की ठंड के बावजूद हजारों श्रद्धालु रात से ही कतारों में खड़े होकर बाबा के दर्शन का इंतजार कर रहे थे।
- प्रशासनिक सतर्कता: भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें मुस्तैद रहीं। पैदल मार्ग से लेकर मंदिर परिसर तक सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं।
- सुविधाएं: तीर्थयात्रियों के लिए स्वास्थ्य शिविर, पेयजल और रहने की उचित व्यवस्था को सक्रिय कर दिया गया है।





