कांग्रेस पार्टी ने गुरुवार को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में कार्य उपस्थिति और सत्यापन के लिए इस्तेमाल हो रहे राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (एनएमएमएस) एप को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने इस डिजिटल प्रणाली को “अव्यवहारिक, असफल और मनरेगा की मूल भावना के खिलाफ” बताया है।
“एनएमएमएस एप बन गया है समस्या का स्रोत”
कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने कहा कि मई 2022 में केंद्र सरकार ने मनरेगा के कामों की निगरानी और उपस्थिति के डिजिटल सत्यापन के लिए एनएमएमएस एप लागू किया। लेकिन, इसके चलते अब तक कई तकनीकी और जमीनी स्तर की समस्याएं सामने आई हैं।
रमेश ने कटाक्ष करते हुए कहा, “मोदी सरकार का असली आदर्श वाक्य है – फर्स्ट अनाउंस, सेकंड थिंक। पहले घोषणा कर दी जाती है, और बाद में उसके परिणामों पर विचार होता है।”
सरकार ने खुद मानी खामियाँ
कांग्रेस नेता ने केंद्र की 8 जुलाई 2025 की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि एनएमएमएस के चलते कनेक्टिविटी समस्याओं के कारण कई वास्तविक श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज नहीं हो पा रही, जिससे वे मनरेगा से बाहर हो जा रहे हैं।
फर्जी मजदूरों पर नहीं लग रहा रोक
रमेश ने दावा किया कि एनएमएमएस प्रणाली फर्जी श्रमिकों को रोकने में असमर्थ है। उन्होंने कहा कि “ऐसे फर्जी नाम वाले लोग दिन में दो बार फोटो खिंचवाकर मजदूरी हासिल कर सकते हैं, चाहे उन्होंने एक मिनट भी काम न किया हो।”
नया समाधान, नई मुश्किलें
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा सुझाया गया नया समाधान — यानी प्रभारी अधिकारी द्वारा फोटोज का भौतिक सत्यापन — समस्या को और भी अधिक जटिल बना देगा। इससे मनरेगा पदाधिकारियों का बहुमूल्य समय फोटो सत्यापन में खर्च होगा और उनके नियमित कार्य प्रभावित होंगे।





