देहरादून। उत्तराखंड में बढ़ती ठोस अपशिष्ट (वेस्ट मैनेजमेंट) की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार नई वित्तीय व्यवस्था तैयार कर रही है। सरकार अब शराब की बोतलों पर विशेष सेस (Cess) लगाने की योजना पर काम कर रही है, जिससे कचरा प्रबंधन के लिए स्थायी आर्थिक संसाधन जुटाए जा सकें।
सरकारी स्तर पर चल रही तैयारियों के अनुसार, राज्य में शराब की कांच और प्लास्टिक बोतलों से बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न हो रहा है। पर्यटन सीजन और शहरी क्षेत्रों में इन बोतलों के निस्तारण की चुनौती लगातार बढ़ती जा रही है। इसी को देखते हुए सरकार “यूजर पे” मॉडल अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है, ताकि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूती मिल सके।
प्रस्तावित योजना के तहत शराब की प्रत्येक बोतल पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। यह राशि सीधे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने, कचरा संग्रहण, रीसाइक्लिंग और वैज्ञानिक निस्तारण पर खर्च की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे नगर निकायों और स्थानीय प्रशासन को वित्तीय सहयोग मिलेगा और सफाई व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सकेगी।
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने और पर्यटन स्थलों को स्वच्छ रखने के लिए दीर्घकालिक समाधान तलाश रही है। खासतौर पर पहाड़ी जिलों में खाली बोतलों का अनियंत्रित फेंकना पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए खतरा बनता जा रहा है। ऐसे में सेस के माध्यम से जिम्मेदार उपभोग और कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
सरकार इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय से पहले आबकारी विभाग, शहरी विकास विभाग और पर्यावरण विशेषज्ञों से विस्तृत विचार-विमर्श कर रही है। योजना लागू होने के बाद शराब कंपनियों और विक्रेताओं के माध्यम से सेस की वसूली की जा सकती है।
यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो उत्तराखंड उन राज्यों में शामिल हो जाएगा, जहां पर्यावरण संरक्षण के लिए उपभोग आधारित कर प्रणाली अपनाई जा रही है। सरकार का लक्ष्य स्वच्छ पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कचरा प्रबंधन मॉडल विकसित करना है।





