नई दिल्ली। 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र के नाम संबोधन में देश की उपलब्धियों, सुरक्षा, विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए नागरिकों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि आजादी केवल अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों का भी स्मरण कराती है।
राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकवाद के खिलाफ देश की दृढ़ नीति और सामर्थ्य का परिचय दिया है। उन्होंने सुरक्षा बलों की बहादुरी और सतर्कता की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि देश की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने विकसित भारत के लक्ष्य को राष्ट्रीय संकल्प से जोड़ते हुए कहा कि देश की प्रगति में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं, महिलाओं, किसानों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों, श्रमिकों और समाज के विभिन्न वर्गों के योगदान को राष्ट्र की शक्ति बताया।
उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और ‘वंदे मातरम्’ के राष्ट्रीय भावना से जुड़े महत्व को भी रेखांकित किया। राष्ट्रपति ने कहा कि यह गीत स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान लोगों को एकजुट करने वाली प्रेरक शक्ति बना और आज भी देशभक्ति की भावना को मजबूत करता है।
राष्ट्रपति ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और संविधान के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराते हुए नागरिकों से देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा में सभी वर्गों की भागीदारी और जिम्मेदार नागरिकता आवश्यक है।
राष्ट्रपति का संदेश ऐसे समय आया है जब देश 80वें स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मना रहा है। उनके संबोधन में राष्ट्र सुरक्षा, स्वतंत्रता संग्राम की विरासत, वंदे मातरम्, विकसित भारत और नागरिक कर्तव्य प्रमुख विषय रहे।





