नई दिल्ली। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) आगामी राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए लोकसभा में अपने संख्याबल को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। गठबंधन का लक्ष्य सदन में दो-तिहाई बहुमत के करीब पहुंचना बताया जा रहा है, जिससे संवैधानिक संशोधनों समेत अहम विधायी कार्यों को पारित कराने में आसानी हो सके।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में एक गुट द्वारा 19 लोकसभा सांसदों के समर्थन का दावा किए जाने के बाद एनडीए के भीतर उत्साह बढ़ा है। माना जा रहा है कि सत्ता पक्ष विपक्षी खेमे से और सांसदों को जोड़ने की कोशिश में लगा है, ताकि संसद में अपनी स्थिति और मजबूत की जा सके।
इसी बीच महाराष्ट्र की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) यानी यूबीटी खेमे को लेकर संभावित टूट की चर्चाएं सामने आ रही हैं। राजनीतिक हलकों में अटकलें हैं कि पार्टी में अंदरूनी असंतोष के चलते कुछ सांसद या नेता अलग राह चुन सकते हैं, हालांकि अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि शिवसेना (यूबीटी) में कोई विभाजन होता है, तो इसका सीधा असर महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन की ताकत पर भी पड़ेगा।
वहीं, विपक्षी खेमे की ओर से इन दावों को फिलहाल राजनीतिक कयासबाजी बताया जा रहा है और कहा जा रहा है कि समय के साथ स्थिति स्पष्ट होगी।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक आने वाले दिनों में संसद और महाराष्ट्र दोनों ही स्तरों पर गठबंधन राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।





